Wednesday, January 21, 2015

ज़िंदगी जीना सही अर्थो में

यह जीवन का सत्य है की हम अक्सर छोटी छोटी बातो के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण चीज़ो का सत्यनाश करते हैं .कुछ छोटे पल जो अक्सर दिली ख़ुशी दे के जाते हैं ..हम यूँ ही बेकार के लालच में गवां देते हैं .....कुछ उदारहण के माध्यम से इन बातो को आसानी से समझा जा सकता है ...

किसी गावं में एक बहुत ही समृद्ध परिवार रहता था ..उस परिवार में दो बेटे थे ..अचानक एक दिन घर के मुखिया यानी कि बाप का स्वर्गवास हो गया ..अब बात आई बँटवारे की ....महीनो बीत गये पर बँटवारे की लिस्ट ना बन पाई ...जिस पर दोनो भाई सहमत होते ...""यह माँ के गले का हार तू कैसे लेगा ...यह तो माँ की हार्दिक इच्छा मेरी पत्नी को देने की थी ..तुम दोनो से तो कभी उसकी बनी ही नही .,..या ...वह सबसे उपर का कमरा मैं तुझे कैसे दे दूँ ? मैं क्या नीचे वाले कमरे में घुट के मर जाऊं ..आदि आदि ..ऐसी  कई बातो पर रोज़ बहस होती और कोई फैसला ना हो पाता ....अंत में पंचों के पास जाने का फैसला किया गया..की वोह जो कह देंगे वही माना जाएगा ...पंचो  ने जब यह सब सुना तो कहा की हम यहाँ पर पाँच ताले लगा रहे हैं .. ..फ़ैसला कल होगा ..सुन के दोनो भाइयों ने भी अपने दो ताले और लगा दिए ...अब दोनो भाई निश्चिंत हो गये की अब कोई अंदेर नही जा पाएगा और कल तो फ़ैसला हो ही जाएगा .....पर रात को जो चुपके से घरो में घुसते हैं वोह भी इसी समाज़ के सदस्य हैं ...उनको भी तो अपना पेट भरना है ..और वोह तो कभी सीधे दरवाज़े से अंदर जाते ही नही ..यानी की चोर महराज़ जी ...सो वह पिछले दरवाज़े से घुसे और सारा घर साफ़ .....
अब सुबह जब पंचों ने और दोनो भाईयों ने खुला दरवाज़ा और सब सामान साफ़ देखा तो हैरां परेशान ...पंचों  ने कहा अब ख़ाली कमरे हैं उन्ही को बाँट लो आपस में ..अब बडा भाई बोला कि मुझे तो मुँबई में नोकरी मिल गयी है मैं तो वहीं जा रहा हूँ ...छोटे तुम्ही अब इन को सँभालो ...छोटा भाई बोला की आपके बगैर में अकेला क्या करूँगा ..आप शहर में धक्के खाए और में यहाँ आराम से रहू .मुझे तो नर्क में भी जगह नही मिलेगी .....यह कह दोनो भाई एक दूसरे से लिपट गये ...पंच  हैरान की यही पहले कर लेते तो इतना नुक़सान ना होता ....इस तरह से कई छोटी बातो को ले कर बड़ी चीज़ो का नुक़सान कर दिया जाता है ..... फ़ोर्ड मोटर कम्पनी के मालिक एक मामूली सा इंसान था ..अपनी मेहनत से वोह संसार का सबसे धन पति आदमी बना ...सारा जीवन उसने उसी धन को कमाने में लगा दिया ...दुनिया की नज़र में वो सबसे सुखी आदमी माना जाता .पर जब एक दिन किसी ने उस से पूछा की आप तो बहुत सुखी होंगे ..आपके जीवन में किसी चीज़ का अभाव ही नही है ....तब फ़ोर्ड ने दुखी हो कर कहा की धन के अलावा मेरे पास सब अभाव ही अभाव है ....मैने सिर्फ़ धन कमाया ..पर कोई अच्छा दोस्त नही बना पाया ..अब यदि कोई बने तो वोह सच दोस्त नही होगा ....अब मेरा बुढ़ापा...बिना अच्छे मित्रो के सूना है .आस पास सिर्फ़ अब ख़ुशमदी लोग ही इख़्हट्ठे किए जा सकते हैं सच्चे दोस्त नही ,,मैं इतना धन कमा के भी अकेला ही रह गया ...मैं धन के पीछे अपने जीवन के सुख के पल खो बैठा ..और अब सब कुछ होते हुए भी अकेला ही हूँ ...फिर वही की छोटी बातो के आगे . जीवन के अच्छा वक़्त यूँ ही गवां दिया ...

दुर्योधन ने पाँच गाँव नही दिए पर अपना पूरा साम्राज्य ,पूरा वंश ,और अपना जीवन दे दिया .....कुमति के कारण हम छोटी छोटी बातो को ख़ुशियों को यूँ ही जाने देते है झूठी तृष्णा के पीछे भाग कर अपने जीवन के कई सूखो को खो बैठते हैं ...ज़िन्दगी बहुत छोटी है में ज्यादा से ज्यादा खुशियाँ बटोर के
किसी को बिना दुख पहुँचाए .हम अपना जीवन जी ले यही ज़िंदगी जीना सही अर्थो में कहलाएगा !!

2 comments:

Kavita Rawat said...

सच सबकुछ तो यही रह जाता है..महाभारत से आखिर किसको क्या सुख मिला ..फिर भी सबक नहीं सीख पाये .....
बहुत अच्छी कहानी के माध्यम से जीवन जीवन कैसे जिए बतलाया है आपने ..धन्यवाद !

dr.mahendrag said...

केवल धन ही सब कुछ नहीं पारिवारिक प्रेम व सामाजिक सम्बन्ध भी ज्यादा महत्व रखते हैं ,काश भाइयों में प्रेम होता तो यह दशा न होती ,अच्छी प्रेरक कथा