Monday, June 03, 2013

आवारा ख्याल कुछ यूँ ही


 आवारा ख्याल कुछ यूँ ही


डर नहीं।।।
इस   दिल को
कि वो अब भी मेरी यादो में है
पर अक्सर न जाने क्यों
इक  ख्याल से बज उठती है
धडकन की सरगम
कि कहीं अब भी उसके
किन्ही ख्यालों में तो हम नहीं !!

***
लिखना फिर मिटाना
फिर काट के लिख जाना
अक्सर
यह दिल कर ही जाता है
लिखते हुए ख़त उनको
और फिर
डर के सहम जाता है
कि
कहीं समझ के उलझ न जाए
इन अनकही ख़त की बातो में !!
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