Monday, April 15, 2013

बहुत बहुत शुक्रिया है दिल से

 "जन्मदिन मुबारक हो "
हर दोस्त परिचित की तरह 
यह कहता ..
साल का पैदाइशी  दिन भी आता है 
मिलता है ,मुस्काराता है .
केक खा के, खिला कर  करता है 
मुहं मीठा ..अपना भी , मनाने वाले का भी .
और फिर लौट जाता है 
अगले साल आने के लिए ..
पर क्या हो तब ...?
जब" वो "आये 
और ढूंढे "मुझे ..."
पर .....
"मैं "उसको नजर ही न आऊं कहीं ?:)
किसी भी इन्सान के लिए ज़िन्दगी में दो चीजे बहुत अहम् होती है ...एक जन्म एक मृत्यु ...यह वाकई हादसों की साजिश ही है कि  दो अहम् वाक्यात से इंसान अनजान होता है ..पहला हादसा गफलत में होता है ,,और दूसरा जब होता है उसको ब्यान करने वाला गायब होता है .,,:) पर जो जन्म से जुड़ा है वह वाकई बहुत दिलचस्प है ...हर पल बीतने वाला लम्हा ज़िन्दगी को जीने की एक नयी सीख दे जाता है..और कभी उदास लम्हों की छाया तो कभी ख़ुशी के अनमोल पल .....
      १४ अप्रैल को ज़िन्दगी के पचास साल पूरे हुए ..बीत गयी आधी सदी ..हर गुजरे लम्हों को संजोते हुए ...लिखते हुए ..कहते हुए ..मुस्कराते हुए ...दिल बहुत चंचल होता है ...हर पल  बीती जिंदगी के कुछ "दुखद पलों "को भूल जाना चाहता है उस वक़्त "विस्मृति" एक वरदान लगती है और कुछ सुखद पलों को वह कभी भूलना नहीं चाहता अपने वर्तमान के साथ रंगों में घोल कर और उसको सुखद बनाए रखना चाहता है ...ऐसे ही कुछ पलों में यादगार इस बार की सालगिरह से जुड़े  लम्हे हैं ...जो कभी भूल नहीं सकती मैं ..और शुक्रिया ज़िन्दगी में लाने वाले इन पलों को लाने वाले दोस्तों ..बच्चो का ..और उस परम ईश्वर का ..
...जन्मदिन का महीना शुरू होते ही ..छोटे भाई का मजाक से  किया गया प्रश्न ""दीदी ज़िन्दगी के पचास साल पूरे कर रही हो ....आखिर क्या अचीवमेंट रही आपकी ..बीते समय में??" ..उसको तो स्नेह से "गुरर्र" कर के चुप करवा दिया ...पर दिल सोच में डूबा कि आखिर क्या पाया ...इतने सालों में और जन्मदिन वाले दिन जवाब सामने था ..जो वक़्त से मिला मुझे ..इतना निश्छल स्नेह दोस्तों ने फेसबुक पर अपने संदेशो से ..लगातार बजते फ़ोन पर जन्मदिन मुबारक कहते लफ़्ज़ों की ख़ुशी ने दिया ...लगा "यार कुछ तो असर है अपना भी "..जो दोस्त इतना प्यार करते हैं ..स्नेह देते हैं ..वक़्त देते हैं .क्या यह उपलब्द्धि  नहीं अब तक के बीते समय की ...:)जो लिखती रही वह आपके सामने ब्लॉग ..या संग्रह के रूप में सामने आता रहा ..पर पूरे कवर पेज की स्टोरी इस जन्मदिन पर अनमोल तोहफे के रूप में संजय पाल ने दी ,,जो बी पी एन टाइम्स में प्रकाशित हुई  ...वाकई यह बहुत अमेजिंग मूमेंट था मेरे लिए .सब दोस्तों का तहे  दिल से शुक्रिया ...जो मेरे लिखे लफ़्ज़ों को इतना मान देते हैं ..और होंसला कुछ और नया लिखने का दे जाते हैं ...
बी पी एन टाइम्स में प्रकाशित कवर स्टोरी 
........और माँ पापा से मिले ईश्वरीय आशीर्वाद .माता की चौकी के रूप में मिला ..
माँ के साथ काटा केक ...बचपन फिर लौट आया :)
तो बाद में बहन भाई और बच्चो की सरप्राइज पार्टी ,,तोहफों से मिला .उनके लिखे लफ़्ज़ों में मिला .....न भूलने वाले पल हैं यह जो ता उम्र साथ रहेंगे ...
किताबो से जुडी  मैं :) .यहाँ भी बच्चो ने केक इसी किताब के रूप में कटवाया :)
पचास साल की उपलब्द्धि यह स्नेह ही तो है ..जो हालात चाहे कैसे भी रहे हो ...पर सब का साथ रहा ...और वह वक़्त आने पर प्यार के रूप में बरसता रहा ..
पचास साल पूरे...:) 
.ज़िन्दगी आगे जीने के होंसला देता रहा ....कभी यूँ ही उदास लम्हों में लिखा था ...
ज़िन्दगी के 
पचास बरस 
गुजारे हैं 
शोर में 
खुद को ही बोलते सुनते हुए 
न जाने फिर भी 
लगता है क्यों 
हर तरफ मेरे सन्नाटे हैं ....
पर अक्सर यह सन्नाटे हमारे खुद के बुने हुए होते हैं ..चाहे तो हम उसको भरा गिलास मान ले ...या आधा खाली गिलास ...सही कहा न मैंने ...ज़िन्दगी तो यही है ...और कुछ बाते कई बार लफ़्ज़ों से अधिक तस्वीरे बोलती है ....यह भी सच है न ?:)
सरप्राइज मिले तोहफे :)
केक यूँ भी :)

बहुत बहुत शुक्रिया है दिल से सभी का ..मेरे इस दिन वाकई "गोल्डन डे "बनाने के लिए  ..गोल्डन जुबली को ख़ास बनाने के लिए ...आँखे भावुक  हो कर नम हैं और ..दिल में एक ख़ुशी जो ब्यान से अभी बाहर है ...पर लफ्ज़ दिल पर लगातार दस्तक दे रहे हैं ..जानती हूँ यह वक़्त आने पर जरुर अपनी बात अपना शुक्रिया मेरे दिल की कलम से ब्यान कर जायेंगे ....शुक्रिया ईश्वर का ..सभी दोस्तों का ..शुक्रिया इतने प्यारे बच्चो का ..:)
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