Friday, February 22, 2013

लफ्ज़ मेरे बोलते हैं दोस्तों की जुबान से:)

लफ्ज़ मेरे बोलते हैं दोस्तों की जुबान से ...साया संग्रह जब पब्लिश हुआ था तब भी लोगों का स्नेह बहुत मिला था जो साया ब्लॉग में पोस्ट किया ...अब जैसे जैसे कुछ मेरी  कलम से पहुँच रहा है सबके पास लोगो का कहा लिखा इस तरह से दिल को छु रहा है कि  सही में इस सुन्दर एहसास को जैसे दिल में संजो कर रख लेना चाहती हूँ ......पिछली  कड़ी में कुछ दोस्तों की कलम से कुछ बातें थी ...इस कड़ी को कुछ और दोस्तों की कलम से आगे बढ़ाते हैं ...

नेहा गर्ग ..मुझे बुक फेयर में पहली बार मिली ...साइन करवा के मुझसे यह संग्रह लिया ..और बाद में बहुत प्यार से इनसे चेट पर बातें जारी रही कुछ ...संग्रह इनके हाथ में .......... इनकी सहेली .मम्मी के पढने के बाद आया और उसका उलहना यह बहुत मीठे शब्दों में करती रही ...अजनबी कभी नहीं लगी मुझे यह दिल के बहुत करीब लगी :) जब उनकी बारी आई इस संग्रह को पढने की तो उनका कहना पहली कुछ कविताओं को पढ़ कर यह रहा ....

रंजू भाटिया जी की कविता पढ़ी "कहा-सुना".....कविता की ये कहा-सुना वाली विधा मुझे बड़ी पसंद आई......कहा उसने सुना दिल ने, कहा मैंने सुना उसने .......वरना तो ज्यादातर कविताओं में सब कहते ही है..सुनने वाला कविता में नहीं होता.....

सन्नी कुमार तिवारी अविनाश  ..फेसबुक से मिले एक छोटे भाई ..देश से बहुत  स्नेह हैं इन्हें ..अधिकतर पोस्ट इनकी आज के हालत को ले कर होती है ...मुझे बहुत अच्छा लगता है इस तरह से युवा पीढ़ी का जागरूक होना अपने आज कल के हालत के प्रति ..लगता है कि  देश में अभी भी कुछ बदलने की उम्मीद बाकी है ..संग्रह पर आये इनके कुछ विचार इस तरह से हैं ....

शुक्रिया सन्नी :)

एक दिन
तुमने बातों-बातों मेँ बताया था कि
तुम्हे बचपन से शौक था
खुद के बनाए
मिट्टी के खिलौनों से खेलना


॰रंजू भाटिया


रंजू भाटिया जी की ये किताब मैने पढ़ा,
दिल खुश हो गया पूरे 111 रचनाओं का अनूठा संग्रह।

जिन दोस्तो को ये पुस्तक पढ़ने का मौका मिले,

जरूर पढ़े ,,,,,,,,,,,,,,,,,
मधु गुलाटी ...मधु इसकी कई बाते मुझे अपने जीवन में बहुत प्रेरणा देती है ...ज़िन्दगी मुश्किलें देती हैं पर हार के बैठने वालों से यह नहीं है ...मेरे दिल के यह बहुत करीब है और मेरी पहली पाठक भी ....मेरी हर रचना को बहुत दिल से पढ़ती है और अपने विचार देती है ..दूसरा संग्रह जल्दी पब्लिश करवाऊं यह इसी की दिली इच्छा थी ..और हर वक़्त मुझे उस के लिए प्रोत्साहित करती रही है ..:)
उस की कलम से यह संग्रह पढ़ कर कुछ शब्द इस तरह से निकले
`कुछ मेरी कलम से` मेरे हाथ में है ...मैं  बहुत खुश हूँ ...तुम्हारी इतनी कविताये पढने  को मिलेंगी . पहली कविता `कहा सुना` ही अंतरमन तक प्रवेश कर गई `कहा उसने मत रुको ठहरा हुआ स्थिर पानी आखिर सड़ जाता हे .........जवाब अभी तक नदारद हे` ...सच में कहने से सुनने तक के सफ़र में इतने पास होने पर भी बहुत कुछ बदल जाता है  अपनी भावनाओ के हिसाब से . शौक कविता की पंक्तिया `आज भी तुम्हारा वही  खेल जारी हे बस खेलने और खिलोनो के वजूद बदल गए हे` बहुत सुंदर हे . सच में तुम दिल की गहरी परतो से लिखती हो तो कविता दिल को छु जाती है .....शुक्रिया मधु .....:)
नीलम चावला ..इनका लिखा हुआ अक्सर मेरे दिल के बहुत करीब होता है ...स्त्री मन की सहज बाते इनकी कलम से खूब सच ब्यान करती है ....कुछ मेरी कलम से संग्रह इन्होने ऑनलाइन मंगवाया और मिलते ही अपनी बात कुछ इस तरह से कही ...:)
क्या कहूँ... सीधे यह  लिख दूँ  कि  आपकी किताब अब मेरे हाथो में है., या लिखूं कि  किताब मुझे मिली थोड़ी देर में ,मगर मैंने   इसे ज़्यादा से ज़्यादा पढ़ने की कोशिश की है. वक़्त मुझे काटता रहा है कामो के बीच ,मगर मैंने  भी वक़्त से नज़र बचाकर उसी की उस से चोरी कर ली और बहुत कुछ पढ़ लिया , थोड़े थोड़े चुराए हुई चिंदियो जैसे वक़्त मैं ... खेर ...

मुझे ये कहना है "आप दिल को बहुत खूब टटोलना जानती है
जानती है कि  दिल की बात कैसे रखी जाए , आपने ज़िंदगी के रंग को हर एक पन्ने पर यूँ  उडेल दिया जैसे कोई साँस ले रहा है बिना जिस्म के..."


पढ़ रही हूँ
ज़िंदगी की किताब
आहिस्ता आहिस्ता
वर्क-दर-वर्क
पन्ना-दर पन्ना

लफ्ज़-बा -लफ्ज़...

हर एक बात दिल को छूती हुई...
हर एक बात जैसे बस दिल की

शुक्रिया आपके इस किताब के लिए , बस वाह!
 
शुक्रिया आप सभी दोस्तों का ...यह कड़ी यूँ ही चलती रहे बस यही दुआ करें :) और इसको पढ़ कर यदि आप भी चाहे  की यह संग्रह आपके भी रहे तो आप इन्हें ऑनलाइन या मुझसे सम्पर्क कर सकते हैं :) शुक्रिया 
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