Monday, December 03, 2012

बेसूझ साया

किसी के प्यार की बाते
मुझे सोने नही देती
दिल के धड़कनो में गूँजती
उसकी आहटे सोने नही देती

बहक रहा है यह
किस बात से यह रात का आलम
फूलो सी महकती
उस बेसूझ साये की ख़ुश्बू
मुझे सपनो में खोने नही देती

सितारे भी चल दिए हैं
अब तो रात का आँचल छोड़ कर
सुबह की ओस में डूबी
दिल के धड़कनो में गूँजती
उसकी आहटे सोने नही देती
सुबह होने नही देती

छाया हुआ है वही
मेरे वजूद पर एक बेसुझ साए की तरह
उसकी यही परछाईयाँ
मुझे किसी और का होने नही देती !!
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