Tuesday, July 31, 2012

गुजरती ट्रेन


घर के
सामने से
गुजरती ट्रेन
कर देती है
नींद का क़त्ल
और क्षत-विक्षित
मन की उलझनों को,.....
जिन्हें सुलाया था
मुश्किलों से......
दर्द से कहराता
और फिर भटकता
रहता है
उनींदा से ख्वाब लिए
मेरा बंजारा मन
सुबह होने तक
फिर से एक नयी जंग के लिए...

मेरे घर के सामने से हर वक़्त ट्रेन जाती रहती है ..दिन में तो अधिक नोटिस नहीं लिया जाता आदत है ..पर रात को गुजरती ट्रेन अक्सर कई कवितायें लिखवा देती है :)
Post a Comment