हर प्रेम कहानी की तरह
मैं भी अपनी प्रेम कहानी का
एक सच हूँ ...!!
"हाँ "तुम नहीं समझ सकते
इसके अंत को
कि कैसा लगता है
प्रेम की गलियों में
भटकने का पागलपन
यूँ ही बैठे बैठे चौंक जाना
और घबरा के अनेक आरोपों को
दूसरे के चरित्र पर थोप देना
लगता है कई बार इस से
कि
कहानी यूँ ही बुन ली जाती है
पर ......
जब मन के
किसी कोने में
अँधेरे हो तब
"कैसे "कोई रोशनी का गीत गुनगुनाये
और मैं इसी "कैसे "को भ्रमा कर
तुम्हे प्रेम का गीत सुनाना चाहती हूँ
बस तुम यूँ ही देखते हुए मुझे .
उस गीत को सुनते रहना ..सुनते रहना!!!!!
मैं भी अपनी प्रेम कहानी का
एक सच हूँ ...!!
"हाँ "तुम नहीं समझ सकते
इसके अंत को
कि कैसा लगता है
प्रेम की गलियों में
भटकने का पागलपन
यूँ ही बैठे बैठे चौंक जाना
और घबरा के अनेक आरोपों को
दूसरे के चरित्र पर थोप देना
लगता है कई बार इस से
कि
कहानी यूँ ही बुन ली जाती है
पर ......
जब मन के
किसी कोने में
अँधेरे हो तब
"कैसे "कोई रोशनी का गीत गुनगुनाये
और मैं इसी "कैसे "को भ्रमा कर
तुम्हे प्रेम का गीत सुनाना चाहती हूँ
बस तुम यूँ ही देखते हुए मुझे .
उस गीत को सुनते रहना ..सुनते रहना!!!!!


