Tuesday, August 09, 2011

सुबह के शगुन

सुबह के शगुन है
जो आते हैं अखबार के साथ
कुछ हत्या .कुछ आत्महत्या
बलात्कार .चोरी और कुछ झगडे

टप से अखबार के साथ टपकते हैं
चाय के साथ गटक लिए जाते हैं

और फ़िर बाकी रह जाता है
बचा हुआ दिन पूरा
जिस में घटती घटनाएँ
फ़िर से गवाह बनती है
आगे आने वाले दिन  की शगुन!!!!
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