Wednesday, September 01, 2010

राधा -मीरा


  • जिस को देखूं साथ तुम्हारेमुझ को राधा दिखती हैदूर कहीं इक मीरा बैठीगीत तुम्हारे लिखती है
    तुम को सोचा करती हैआँखों में  पानी भरती है उन्ही अश्रु की स्याही से लिख के खुद ही पढ़ती है
    यूँ ही पूजा करते करतेकितने ही युग बीत गये बंद पलकों में ही न जाने कितने जीवन रीत गये खोलो नयन अब अपने कान्हा पलकों में तुम को भरना हैपूजा जिस भाव  से तुम्हे उसी से प्रेम अब तुमसे करना है
    आडा तिरछा भाग्य है युगों सेतुम इसको सीधा साधा कर दोअब तो सुधि लो  मेरे कान्हामीरा को राधा कर दोहाथ थाम लो अब तो कृष्णा इस भव सागर से पार तुम कर दो ...


34 comments:

वन्दना said...

अब तो यही चाह बाकी रह गयी है मगर वो तो निष्ठुर है इतनी जल्द कब पसीजता है फिर भी कभी तो इंतज़ार पूरा होगा……………………बेहद उम्दा प्रस्तुति………………यूँ लगा जैसे मेरे भाव भर दिये हों…………………आभार्।

dimple said...

मीरा का इंतज़ार लम्बा है...युगों युगों का...

कविता रावत said...

आडा तिरछा भाग्य है युगों से
तुम इसको सीधा साधा कर दो
अब तो सुधि लो मेरे कान्हा
मीरा को राधा कर दो
हाथ थाम लो अब तो कृष्णा
इस भव सागर से पार तुम कर दो ...
...सचे मन की पुकार भले ही देर से सुनी जाय, लेकिन एक न एक दिन जरुर सुनी जाती है.. बस सब्र हो..
जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ

Arvind Mishra said...

भावपूर्ण रचना !

Shikha .. ( शिखा... ) said...

बहुत प्यारी सी और भावपूर्ण रचना, रंजू दीदी !!!

indu puri said...

जानती हो मैं चित्तोड गढ़ मे रहती हूं चित्तोड यानि 'मीरा' का ससुराल.ये ना कहना कि बहुत दुःख दिए उस बावली को ससुराल वालों ने.किन्तु आज वो प्रेम के उद्दात्त रूप मे भक्त शिरोमणी कहलाती है कृष्ण भक्ति को सबने मान दिया.
प्रेम डगर तो यूँ भी काँटों भरी है,जो इस पर चला,लहुलुहान हुआ.पहले इन्हें पत्थर ही मिले फिर भले समाज ने 'मिसाल' बना दिया.
अपनी कविता मे मीरा की कसक,उनकी पीड़ा की गहनता लिए स्वयं आप (???)नही तुम 'मीरा' सी दिखने लगी.
हममे एक मीरा और एक राधेरानी युगों से जी रही है और रहेगी तुमने बरबस उसके आँसू अपनी आंखों मे भर लिए और वो ....लिख गए ये कविता.
तुम्हे ढेर सारा प्यार और तुम्हारी इस कविता को एक चुम्बन कहना मेरी ओर से.
क्या लिखूँ????

Mukesh Kumar Sinha said...

krishna janmastmi ke purv sandhya pe radha aur meera ki yaad.......:)

bahut sundar.......abhivyakti!!

रंजना [रंजू भाटिया] said...

@इंदु जी ..हममे एक मीरा और एक राधेरानी युगों से जी रही है और रहेगी तुमने बरबस उसके आँसू अपनी आंखों मे भर लिए और वो ....लिख गए ये कविता.............

आपके लिखे यह शब्द मेरे लिए इसको लिखने का इनाम दे गए ....मुझे इस नटखट कान्हा से दिल से प्रेम है ...जब से होश संभाला खुद को इन्ही से लड़ते झगड़ते पाया ...और भी जब भी आँखे बंद कर के सोचा तो इंसान की दी हुई यही सूरत नजर आई ..न जाने कितनी बार कितना कुछ लिखा इसी विषय पर बहुत कम पोस्ट किया ...यह भी उन्ही में से एक है ..
आपका तहे दिल से शुक्रिया ...मेरा मानना है कि हर प्रेम करने वाले और उसको पहचाने वाले दिल में यही राधा और यही मीरा रहे ....आपकी लिखी यही पंक्तियाँ मेरे लिए बहुत बड़ी प्रेरणा का स्रोत बन गयी है .जो हमेशा मेरे साथ रहेंगी....

रंजना [रंजू भाटिया] said...

@ वंदना कृष्णा से यूँ कहना तो सबका वाकई एक जैसा ही लगता है ...आपका तहे दिल से शुक्रिया .

@ डिम्पल सही कहा यह इन्तजार न जाने कब खत्म होगा .
@ शुक्रिया कविता जी सुने तो सही वो देर से सही भले :)

शुक्रिया अरविन्द जी ..

शिखा बहुत दिनों बाद तुम्हे यहाँ देख कर बहुत
अच्छा लगा

शुक्रिया मुकेश जी ...

shikha varshney said...

bahut bhav purn likha hai

रंजना said...

आह !!!! भावयुक्त अति पावन प्रार्थना...

Sonal Rastogi said...

kabse chaah rahi hoon mea ho jaaye par wo to mera pata hee bhool baitha hai ..aapko mile to meri bhi sudh dila dijiyega

रश्मि प्रभा... said...

प्रेम की इतनी सुन्दर भाषा गोकुळ से ही होती है...
बहुत ही सुन्दर भाव

महेन्द्र मिश्र said...

बहुत बढ़िया प्रस्तुति ...
जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाये
जय श्रीकृष्ण

संजय भास्कर said...

आपको और आपके परिवार को कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

तुम इसको सीधा साधा कर दो
अब तो सुधि लो मेरे कान्हा
मीरा को राधा कर दो...

बहुत सुन्दर पंक्तियाँ ....जन्माष्टमी की शुभकामनाएं

Kishore Choudhary said...

यह सचमुच प्रेम का अमिट आख्यान है. बात युगों तक बिना रुके कमल के फूलों के भर से दबी हुई चलती ही रहती है.
आपने बहुत सुंदर लिखा है, बधाई.

महफूज़ अली said...

जन्माष्टमी के पावन अवसर पर आपको और आपके परिवार के सभी सदस्यों को हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई!

अभिषेक ओझा said...

श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी, हे नाथ नारायण वासुदेव.

Udan Tashtari said...

बहुत बढ़िया भावपूर्ण रचना. जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ.

Udan Tashtari said...

बहुत उम्दा भावपूर्ण रचना.

श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाये.

Akanksha~आकांक्षा said...

अब तो सुधि लो मेरे कान्हा
मीरा को राधा कर दो
हाथ थाम लो अब तो कृष्णा
इस भव सागर से पार तुम कर दो ...

...खूबसूरत अभिव्यक्ति.
श्री कृष्ण-जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें.

प्रवीण पाण्डेय said...

बड़ी ही सुन्दर व आत्मिक रचना।

Anand said...

आडा तिरछा भाग्य है युगों से
तुम इसको सीधा साधा कर दो
अब तो सुधि लो मेरे कान्हा
मीरा को राधा कर दो..

aapki kavita bahut achi hai..krashana prem aapke mann aur sabdo se bus ufan kar gir raha hai...

uper likhi lines meri fav hai...

aap jab bhi likhe, jaroor post kare.ye kisi ko likhne ki prerna de sakta hai, aur sayed vo aapka abhari rahe..:)


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निर्मला कपिला said...

अब तो सुधि लो मेरे कान्हा
मीरा को राधा कर दो
बहुत सुन्दर गीत । शुभकामनायें।

स्वप्निल कुमार 'आतिश' said...

आडा तिरछा भाग्य है युगों सेतुम इसको सीधा साधा कर दोअब तो सुधि लो मेरे कान्हामीरा को राधा कर दो


behadi shandar lagi ye panktiyaan ....prem aapne sabse sundar roop me dikhayi pad raha hai ..poore samaprpan ek sath ...janmashtmi ki shubhkamnayen .....

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

इस भावमयी प्रस्तुति को पढकर मन मुदित हो गया।
………….
जिनके आने से बढ़ गई रौनक..
...एक बार फिरसे आभार व्यक्त करता हूँ।

अर्चना said...

meera ke maadhyam se har prem karane waale ki pida our pratiksha bayan karati hai ye kawita.

दिगम्बर नासवा said...

आडा तिरछा भाग्य है युगों से
तुम इसको सीधा साधा कर दो
अब तो सुधि लो मेरे कान्हा
मीरा को राधा कर दो

कृष्ण ने कब फ़र्क किया है राधा और मीरा में ... फिर भी मीरा की चाह है ....
बहुत भाओक मन से लिखी रचना है ... बहुत लाजवाब ...

Mrs. Asha Joglekar said...

सुंदर भावभीनी रचना ।

रचना दीक्षित said...

अब तो सुधि लो मेरे कान्हा
मीरा को राधा कर दो

प्यारी सी और भावपूर्ण रचना

शरद कोकास said...

मीरा को राधा कर दो अद्भुत कल्पना है ।

sada said...

बहुत ही सुन्‍दर शब्‍द एवं भावमय प्रस्‍तुति ।

मीनाक्षी said...

प्रेम का अदभुत भाव अनायास यहाँ खींच लाया...आज बस अपने होने का एहसास टिप्पणी लिखवा गया... वैसे तो पढ़ने का मौका जब भी मिलता है पढ़ कर भाव विभोर हो जाते हैं.