Tuesday, September 30, 2008

छूना है मुझे आसमान .मत रोको मेरी उड़ान .

नारी शक्ति से अब कोई अपरिचित नही रहा है | हर कदम में नारी आगे बढ़ रही है और इतिहास रच रही है | अपने देश में न केवल वरन विदेश में भी वह भारतीय नारी का नाम रोशन कर रही है | कल्पना चावला के नाम से कौन अब अपरिचित रहा है | वह भारत में हरियाणा के एक छोटे से शहर से निकल कर अन्तरिक्ष कि ऊंचाई को छु गई तो सिर्फ़ अपनी मेहनत और अपने बलबूते पर | आज से दुर्गा पूजा शुरू हुई है और नारी इसी दुर्गा का अवतार हैं ..आज उनकी उड़ान को कम नही आँका जा सकता है ....देश विदेश में आज भारतीय महिलाओं की धाक जमी हुई है ...

ऐसी ही अनगिनत महिलायें हैं जिन्होंने अपनी अदभुत कामयाबी से परदेश में भी अपनी सफलता के झंडे गाड़ दिए हैं | इस में एक हैं बी. बी .सी हिन्दी डाट कॉम में काम करने वाली सलमा जैदी | यह मूल रूप से उत्तर प्रदेश की रहने वालीं है | इनका परिवार लेखन और पत्रकारिता से जुडा हुआ है इसी ने इन्हे लेखन की और प्रेरित किया | शुरू में इन्होने भारत में ही कई समाचार पत्रों में और कई समाचार एजंसी में कॉम किया | यहीं से इनका परिचय दिल्ली आफिस बी.बी. सी से परिचय हुआ | तब यह वहां शुरू ही हुआ था | उसके बाद यह दफ्तर लन्दन १९९९ में चला गया ,तब से यह वहीँ पर काम कर रही हैं | और आज अपनी मेहनत से एक प्रतिष्टित स्थान पर हैं |

रास्ता इनके सरल नही था ,हिन्दी ऑनलाइन टीम में काम करना भी इनके लिए एक नया अनुभव था और साथ में काम करने वाले सहयोगी भी नए | पर इन्होने हर चुनौती को स्वीकार किया | साथ ही अपने घर परिवार को भी संभाला | उनका सफल होने का मूल मन्त्र है कि असफलता आने पर ही हम सफलता के सही मायने तलाश करते हैं और फ़िर सफल भी होते हैं |

इसी तरह से एक और कामयाब महिला है जो भारत की धरती नागपुर विश्वविद्यालय से संस्कृत में पी .एच .डी हैं | शादी के कुछ समय बाद ही इनके पति विदेश चले गए | तब यह मुंबई विश्वविधालय में पढाती थी | १९७३ में यह भी अपने छोटे से बेटे को लेकर पति के पास चलीं गई | कुछ साल अपने बेटे और घर को अच्छे से संभाला ,पर जो शिक्षा हम हासिल करते हैं वह हमारे साथ हमेशा रहती है | वह इसी बीच अनेक शोध पत्र लिखने और उन्हें प्रकाशित करवाने का काम भी करती रहीं और कई पुस्तके भी लिखी इन्होने | १९८३ में इन्होने इलिनाय विश्वविधालय में लिंग्वास्तिक्स रिलीजियस स्टडीज एंड कॉपरेटिव लिटरेचर में नौकरी कर ली | यह पढाने का सिलसिला इन्होने दस साल बाद शुरू किया पर पूरे लग्न और मेहनत से आज यह ऊँचे मुकाम पर है |

अमेरिका में सफल भारतीय महिलाओं में निहारिका आचार्य का भी नाम शामिल है | वह वाइस आफ अमेरिका कि एंकर और संवाददाता हैं | २००२ में भारत से यहाँ यह पढ़ने आई थी और यहीं से इन्हे एक दिशा में काम करने का उत्साह मिला और यह उनकी ज़िन्दगी का एक नया मोड़ साबित हुआ | यहाँ पर वाइस आफ अमेरिका ने अपना हिन्दी टीवी चैनल खोलने कि घोषणा की | उनकी प्रतिभा यहाँ काम आई और वह यहाँ की एंकर और संवाददता बन गई |

अपने इस अनुभव के आधार पर वह कहती है कि महिलाओं को आत्मनिर्भर होना चाहिए ,क्यूंकि आत्मनिर्भरता के आभाव में हमारी मौलिकता और रचनात्मकता दब जाती है | उसको पनपने के लिए आगे बढे .रास्ते में मुश्किलें मिलेंगी पर आप परेशान न हो | अपनी धुन ,श्रेष्ट काम और अथक मेहनत से अपने काम में लगे रहें | सही समय आने पर आपके कामों कि सरहाना जरुर होगी और सफलता आपके कदम चूमेगी |

ऐसी कई मिसाले हैं हमारे सामने जिन्होंने अपनी लगन मेहनत और अपने आत्मविश्वास से देश के बाहर भी एक इतिहास रच कर रख दिया है | जो आज आने वाली पीढी को यह बताता है कि महिलायें अब अबला नहीं है वह अपने विश्वास से सब पा सकती हैं | वह सही में दुर्गा ,लक्ष्मी और सरस्वती का अवतार हैं .दुर्गा के नव रूप की यही सही पहचान है ..
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