Saturday, February 10, 2007

दिल यूँ ही मचल गया


बदली यह हवा है यह बदला मेरे दिल का आलम है
दिल के हर कोने में बस मुस्कराता हुआ सा तू बस गया

पिघला है यह आसमान या फिर घुला है रंग तेरे प्यार का
आज यह समा गुलाबी रंगत में कैसे निखर गया

नये- नये से खिले- खिले से कुछ लगते हैं एहसास अपने
या तू मेरे ख्वाबो की तबीर में आ के फिर से ढल गया

मचल लेने दे आज मुझे अपने पहलू में सनम
कि आज तेरी नज़रो से मेरे दिल में फिर से कोई कमल खिल गया!!

मिलेगा इस तड़पती रूह को और सकुन तब ही
जब तेरे प्यार की बारिश में यह तन मन मेरा जल गया !!
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