Saturday, January 20, 2007

मेरा दीवानापन


अब तेरे लिए मेरा दीवानापन
इससे ज़्यादा और क्या होगा
देखते हैं जिस ख़त पर नाम तेरा
सोचती हूँ तेरा यह पैगाम मेरे लिए ही होगा

तेरे गीत तेरी नज़्म में पढ़ा है जब भी प्यार के शब्दो को
क्यों यह लगता है कि तूने यह मेरे लिए ही लिखा होगा

जब भी ढलका है शाम का आँचल जो कही
मुझे क्यों लगता है कि तू कही इंतज़ार मेरा करता होगा

चूमा है जब भी भंवरे ने किसी कली को मुस्करा के
क्यों लगा मुझे कि तूने ख़्यालो में मेरे लबो को चूमा होगा

जब भी बरसा है बादल झूम के धरती पर कभी
क्यों लगा मुझे की तूने मुझे अपनी बाहो में समेटा होगा

धड़का है जब भी मेरा दिल ज़ोर से कभी या ली हैं मेने हिचकियाँ
रहा मेरे दिल को यही एहसास की तूने दिल की गहराइयों से याद मुझे किया होगा

यह मेरा दीवानापन कही और दीवाना ना कर दे मुझको
अब इससे ज़्यादा तेरी मोहब्बत का नशा और क्या होगा !!
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