Wednesday, June 24, 2026

राख (रंगा बिल्ला)


 कल रात Prime Video की नई सीरीज़ "राख"देख कर खत्म की ,देखते हुए बचपन की कुछ यादें याद आई ।

https://www.facebook.com/share/p/1JWm6hqjqN/


जब रंगा-बिल्ला कांड हुआ था, तब हम बहुत छोटे थे। घटना की पूरी समझ नहीं थी, लेकिन "रंगा-बिल्ला" नाम याद है ।तब हम लोग देर रात तक घर के सामने पार्क में खेलते रहते थे। उछलते-कूदते अंधेरा होने पर भी पास की मार्किट तक भी  चले जाते थे। 


 कुछ धुंधला सा याद आता है कि  इस घटना का कुछ तो असर हुआ था । मुझे आज भी याद है, जब एक शाम मैं घर से थोड़ी दूर मार्केट में सिर्फ ब्रेड लेने चली गई थी, तो लौटकर पापा से बहुत डांट  पड़ी थी। उस वक्त समझ नहीं आया था कि पापा इतने गुस्से में क्यों थे, लेकिन आज 'राख' देखते हुए समझ आया कि वह गुस्सा नहीं, बल्कि एक  पिता का वो डर था जो इस खौफनाक हादसे से देश के हर पेरेंट्स के दिल में भर आया था। 'राख' देखते हुए बचपन का वो डर और पापा की वो डांट आंखों के सामने तैर गई।


राख सिर्फ एक क्राइम थ्रिलर नहीं है। यह दिखाती है कि किसी अपराध का दर्द सिर्फ पीड़ित तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरा परिवार, उनका भरोसा और समाज भी उसके साथ टूटता है। पुरानी रीयल घटना को फिर से इस तरह देखना वाकई दर्दनाक है ।


 उस वक्त को आज के कलाकारों ने बहुत ही खूबी से किया है। अली फज़ल इनकी एक्टिंग इस में  भूली नहीं जा सकती उनके चेहरे पर दिखने वाला गुस्सा, बेबसी और इंसाफ की तलाश दर्शक को कहानी के भीतर खींच लेती है। 

सोनाली बेंद्रे को जितना मौका मिला एक मां  के दर्द को इन्होंने बहुत अच्छे से दर्शाया ।

रंगा और बिल्ला के किरदार,उफ्फ! भाई  इन कलाकारों की एक्टिंग तो भूली नहीं जा सकती  ,दोनों ने इन पात्रों की क्रूरता, विकृत मानसिकता और भयावैहता को इतने वास्तविक ढंग से पर्दे पर उतारा है कि कई बार उन्हें देखते हुए मन में  नफरत पैदा होने लगती है। कई दृश्यों में उनकी केवल मौजूदगी ही बेचैनी और डर पैदा कर देती है।


 कुछ दृश्य और भाषा  गालियां अच्छी  नहीं लगी लेकिन शायद उस दौर के भय और क्रूर सच को दिखाने के लिए यह शायद जरूरी हों। कुछ डायलॉग बहुत ही बेहतरीन  लगे याद रहेंगे यह जैसे अपराध की सबसे बड़ी सज़ा जेल नहीं, किसी परिवार की हमेशा के लिए उजड़ गई दुनिया होती है।

 न्याय मिलने और दर्द खत्म होने में बहुत फर्क होता है।

 कुछ हादसे फाइलों में बंद हो जाते हैं, लेकिन लोगों के दिलों में हमेशा खुले रहते हैं।और सबसे बढ़िया तो यह कि जो आज के वक्त में अहम है 

 एक शहर की पहचान उसकी इमारतों से नहीं, उसके बच्चों की सुरक्षा से होती है।


    वाकई यह सीरीज उस वक्त की हर बात को याद दिला गई ।यह सिर्फ एक सीरीज़ नहीं, बल्कि उस दर्द, डर और सामाजिक स्मृति की कहानी है जिसे समय भी पूरी तरह मिटा नहीं पाया।


#Raakh #PrimeVideo #AliFazal #SonaliBendre #WebSeriesReview  #RangaBilla #CinemaUncut #SuspenseThriller #MustWatch

No comments: