Wednesday, June 24, 2026

हनीमून या डेथ मून ?

 हनीमून या 'डेथ-मून'? ट्रैकिंग के बहाने मौत का नया ट्रेंड! 

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आजकल की हत्याओं में एक नया और बेहद खौफनाक 'ट्रेंड' देखने को मिल रहा है—"घुमा-घुमा के मारना!"


वाह रे आधुनिकता! पहले लोग प्यार जताने, यादें संजोने और जिंदगी की नई शुरुआत करने के लिए हिल स्टेशन या ट्रैकिंग पर जाते थे। आज का ट्रेंड देखो तो पार्टी करो, घूमने जाओ, शादी से पहले या शादी के बाद हसीन वादियों का लुत्फ उठाओ... पर वापस 'सकुशल' आओगे या नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं!


 अब पहाड़ सिर्फ खूबसूरत नज़ारे नहीं देते, बल्कि कुछ शातिर दिमागों के लिए 'परफेक्ट मर्डर स्पॉट' बन चुके हैं। सोचिए, कितना खौफनाक दौर है यह! जो हाथ थामकर जीवन भर साथ चलने की कसमें खा रहा है, वही पीछे से खाई में धक्का देने के लिए सही एंगल ढूंढ रहा है।


लड़कियों का बिना किसी खौफ, बिना किसी हिचकिचाहट के ट्रैकिंग और घूमने के बहाने ऐसे फुल-प्रूफ मर्डर प्लान बनाना हैरान भी करता है और रीढ़ में एक सिहरन भी पैदा करता है। दिल बहलाने के लिए सांप का बहाना बना दिया जाता है, और जब पहली बार में मौत चूकी, तो दोबारा बड़ी तसल्ली से प्लान तैयार किया जाता है। 


कानून का डर? वो तो जैसे म्यूजियम की चीज हो चुका है। यह कैसी 'आर्थिक और मानसिक आज़ादी' है, जहां पार्टनर को छोड़ना हो तो कानूनी रास्ते के बजाय खाई का रास्ता चुना जा रहा है? 


समाज की हालत इस कदर बिगड़ चुकी है कि अब किसी के साथ ट्रिप पर जाने से पहले इंसान को लाइफ इंश्योरेंस के साथ-साथ अपनी जान की सलामती की दुआ मांगनी पड़ रही है।


अर्थव्यवस्था की ग्रोथ रेट तो आसमान छू रही है, लेकिन रिश्तों की 'मोरालिटी रेट' पाताल में धंस चुकी है। अगर अपनों के साथ घूमने जाने में भी 'सर्वाइवल किट' और शक का चश्मा लगाकर जाना पड़े, तो समझ लीजिए कि एक समाज के रूप में हम पूरी तरह वेंटिलेटर पर आ चुके हैं!




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