Friday, February 15, 2013

लम्हे

कुछ लम्हे उदास से
कुछ खुशनुमा से
मिले यादो के कोने से
 उन्हें बटोरा दिल ने फिर से
एक "इस "कोने से
एक "उस "कोने से
कुछ लिपटे थे शाम के धुंधले साए में
और कुछ थे सुबह सूरज के आगोश में "सुबकते "
फिर जब भर के मुट्ठी में देखा तो
कुछ साँसे अभी भी मुस्करा रहीं थी उन लम्हों में !!...........#

9 comments:

संजय भास्‍कर said...

कुछ साँसे अभी भी मुस्करा रहीं थी उन लम्हों में !
......बहुत खूब कहा है दी बसंत पंचमी की शुभकामनाएँ !!!

सदा said...

फिर जब भर के मुट्ठी में देखा तो
कुछ साँसे अभी भी मुस्करा रहीं थी उन लम्हों में !!........
वाह ... बहुत खूब ...

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बस ये मुस्कान कायम रहे ...

Rajendra kumar said...

बसन्त पंचमी की हार्दिक शुभ कामनाएँ!बेहतरीन अभिव्यक्ति.

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

हमेशा मुस्कराहट बनी रहे उन लम्हों में,,,

recent post: बसंती रंग छा गया

Asha Joglekar said...

कुछ साँसे अभी भी मुस्करा रहीं थी उन लम्हों में !!...........#
यही लम्हे तो देते हैं जीने का उत्साह ।

sushmaa kumarri said...

कोमल भावो की अभिवयक्ति......

rashmi ravija said...

फिर जब भर के मुट्ठी में देखा तो
कुछ साँसे अभी भी मुस्करा रहीं थी उन लम्हों में !!...........#
bahut sundar :)

mukti said...

खूबसूरत ! आख़िरी लाइनें तो बहुत ही ज़्यादा खूबसूरत हैं. आखिर में मुस्कराहट ही बाकी रहनी चाहिए.