Sunday, February 03, 2013

कुछ मेरी कलम से

बिखरी हुई मैं अपनी ही कविता के अस्तित्व में
जैसे कोई बूँद बारिश की गिर के मिट जाती है
और कह जाती है वह सब कुछ अनजाना सा
दिल में कभी एक तड़प ,कभी एक सकून दे जाती है
करना हो मुझे तलाश तो कर लेना इन लफ्जों में.........यह लफ्ज़ उपलब्ध रहेंगे" कुछ मेरी कलम से "संग्रह ...यह संग्रह उपलब्ध है अब चार फ़रवरी से दस फ़रवरी तक विश्व पुस्तक मेले में हाल नम्बर १२ के स्टाल नम्बर बी -१० में ...........मुझे आप सबका इन्तजार रहेगा ....
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