Wednesday, July 25, 2012

इजहार

सीखा जब से दिल ने धडकना
इस ने बस तेरी चाह में
जीना सीखा
सजाती रही ख्वाब
नजरे नजरों से मिल कर
और बीतेगा जीवन यूँ ही
इन्ही ख्यालों
में बस रहना सीखा

फिर चली
वक़्त की कुछ ऐसी आंधी
दिलो में दबा कर हर इजहार
आंसुओ को दबा कर
लबों ने  मुस्कराना सीखा
और ...
वक़्त गुजरता रहा
दिनों ,वर्षों और मौसमों को
पार करते हुए
पर जहाँ रुके थे कदम
उसी मोड़ पर दिल
ठहरा रहा
ज़िन्दगी नाम है
परिवर्तन का
यही बस दिल खुद को समझाता रहा

पर आज  दिल में आता है
कि वापसी की  एक लम्बी उडान भरूँ
छू लूँ  बीते वक़्त को
तोड़ दूँ हर रिश्ते रस्मों रिवाजों को
  और टूट कर प्यार करूँ
इजहार करूँ

पलट दूँ अपने जीवन के पन्ने सब
और लिख दूँ पत्थर की कलम से
समय के सीने पर नाम तेरा
और बाकी बची ज़िन्दगी
बस अब तेरे नाम करूँ ..!!!!


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