जब करनी होती ख़ुद से बाते तो में कुछ लफ्ज़ यूँ दिल के कह लेती हूँ ....
ज़रा थम थम के रफ़्ता रफ़्ता चल ज़िंदगी कि यह समा या फ़िज़ा बदल ना जाए
अभी तो आई है मेरे दर पर ख़ुशी कही यह तेरी तेज़ रफ़्तार से डर ना जाए!! - रंजू
Tuesday, May 31, 2011
सफ़र अनजाने
ज़िन्दगी तेरे
कुछ सफ़र
यूँ ही
क्यों
अनजाने होते हैं
जैसे बेनूर नजरों में
कोई चिराग नहीं जलता
बहारों का मौसम भी
पतझड़ को नहीं बदलता
और .....
तुमसे मिलने का
कोई भी वक़्त
क्यों तय नहीं होता...
33 टिप्पणियाँ:
वाह ... बहुत खूब यह सफर अंजाने ... बेहतरीन प्रस्तुति ।
क्या बात है....
बहुत बढ़िया..
beautiful...
बहारें आयेगीं ऐसी भी क्या बेकरारी :)
waaahj...kam shabdon me sundar prastuti.
बहुत खूब
kya khoobsurat baat kahee!!
बहुत खूब !
जैसे बेनूर नजरों में
कोई चिराग नहीं जलता
बहारों का मौसम भी
पतझड़ को नहीं बदलता
बहुत मार्मिक पंक्तियाँ
बहुत बढ़िया
अनजाने सफ़र का कोई राहगीर नहीं होता (अंजु...अनु )
बहुत सुंदर जी...
. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति्
ज़िन्दगी तेरे
कुछ सफ़र
यूँ ही
क्यों
अनजाने होते हैं
बेहतरीन रचना....
जिंदगी शायद इसी को कहते हैं .... कब क्या हो कुछ पता नही ... .
रंजना जी
"तुमसे मिलने का
कोई भी वक़्त
क्यों तय नहीं होता... !"
शानदार रचना, जितनी बार पढ़ो उतनी बार नयी और दिलकश लगे.
वाह बहुत सुंदर.
http://shayaridays.blogspot.com
bahut khoob
कम शब्दों में बहुत कुछ कहती कविता .
-जब कुछ समझ न आये तो चलते रहें ..शायद मंजिल तक पहुँचने का एक रास्ता यह भी है.
http://shayaridays.blogspot.com
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Jindagi ke safar aise hee anjane hote hain par jab kiseese milane kee ummeed sabse kum hotee hia to mulakat achanak ho jatee hai. Badhiya Ranju ji
पीड़ा की प्रभावशाली अभिव्यक्ति....वाह..
shaandar rachna
please come to my blog
http://bahut-kuch.blogspot.com/
bahut umda prastuti....bahut khub
प्रभावी अन्दाज़े बयाँ .........
yahi zindgi yahi hai jeena..
sundar prastuti.
जीवन भी और इसका सफर भी अद्भुत है वक्त से साँठ गाँठ कर चलता है। सिन्दर भाव। शुभ .का.
और .....
तुमसे मिलने का
कोई भी वक़्त
क्यों तय नहीं होता...
sunder abhivyakti
rachana
सवाल से रचना की पूर्णाहूति - बेहतर अंदाज़ - वाह रंजू जी.
सादर
श्यामल सुमन
+919955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
जैसे बेनूर नजरों में
कोई चिराग नहीं जलता
बहारों का मौसम भी
पतझड़ को नहीं बदलता ..बहुत बढ़िया....बहुत मार्मिक पंक्तियाँ
बहुत बढ़िया..likhte rahr u hi.
VINAY G. DAVID,
EDITOR- TIMES OF CRIME
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very nice...! :-)
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