Saturday, August 29, 2009

एक बारिश की शाम

औरत का दिल ईश्वर ने ऐसा बनाया है कि हर वक़्त प्यार के खुमार में डूबा रहता है कुछ नया खोजता सा ,कुछ नया रचता सा। रजनीश ज़ी के लफ़्ज़ो में .. सारी तहज़ीब स्त्री के आधार पर बनी,घर ना होता तो, नगर ना होते ... नगर ना होते ,तो तहज़ीब ना बनती ...मर्द और औरत दोनो के सहज मन अलग -अलग होते हैं . .इस लिए प्रेम मर्द के लिए बंधन हो जाता है और औरत के लिए मुक्ति का मार्ग, पर वह बंधे रहना चाहती है सिर्फ़ अपने प्रियतम के प्यार से ..उसको खोने का डर उस पर हर वक़्त हावी रहता है ...इसी ख्याल पर बुनी गई है यह कहानी ...

वो बहुत सुंदर नही थी और नाम था उसका मीता ....पर अपने आपको सज़ा के रखना उसे ख़ूब आता था बुद्धिमान थी ,.वक़्त के अनुसार चलना जानती थी ।.पैसा पास था खर्च करना उसका शौक था, जो चीज पसंद आ जाती ले लेती, बिना सोचे की यह कितने की है !घर सजाना और दूसरों का ध्यान सदा कैसे अपनी तरफ़ रखना है यह उसको अच्छी तरह से आता था ! शादी शुदा थी ..एक प्यारा सा बेटा था .... पति साहिल जो हर पल उसके चारों ओर घूमता रहता .....वह जो चीज़ चाहती ख़रीद लेती ....और साहिल हर पल उसको प्यार करके कहता ' तुम्हारी लाई हर चीज़ सुंदर .. ...तुम्हारी हर ख़ुशी मेरी ख़ुशी ."".बस वो सुन के इठला उठती अपने पर, और मुस्करा कर उसकी बाहों में समा जाती !
एक शाम मौसम बहुत सुहाना था सोचा चलो आज बाज़ार घूम के आते हैं |साहिल के आने में अभी देर थी
उसने कार उठायी और बाज़ार की तरफ चल पड़ी ! यूँ ही घूमते-घूमते उसकी नज़र एक बहुत ख़ूबसूरत, कान के बूंदों पर पड़ गई ..सात रंगो से सजे वो बूंदे जैसे उस को अपनी तरफ बुला रहे थे |वह दुकान के अन्दर गई और दाम पूछे पर उस वक्त जो कीमत दूकानदार ने बतायी ,उतने पैसे उसके पास नही थे ..थोड़े से पैसे दे कर उसने वह बूंदे अपने नाम करवा लिए और फ़िर आ के लेने की बात कह कर दुकान से बाहर आ गई ..

जब बाहर आई तो बारिश शुरू हो चुकी थी वह अपनी कार की तरफ़ गई तो एक मासूम सी सुंदर जवान लड़की उसके पास आ के खड़ी हो गयी ..और बोली कि वह बहुत भूखी है.कुछ पैसे दे ,जिस से वो खाना खा सके !
मीता ने उसको सिर से पाँव तक देखा ....फटे कपड़ो में भी उसमें एक कशिश थी , पर्स खोल के पैसे देने ही लगी थी कि एक विचार उसके दिल में आया ..कि यह इस हालत में क्यों है ??यहाँ पूछा तो यह बताएगी नही क्यों न इसको अपने घर ले जाऊं इसकी कहानी भी पूछ लूंगी और खाना भी खिला दूंगी ,अगली किटी पार्टी में कुछ तो नया सुनाने को और अपनी अमीर सहेलियों पर कुछ तो रुआब पड़ेगा ,.यह सोच के उसके होंठो पर एक मुस्कुराहट आ गयी ...

उसने उस लड़की से कहा .." मेरे साथ मेरे घर चलो ..मैं तुम्हे भर पेट खाना खिलाउँगी.."
लड़की सहम गयी ... 'नहीं नहीं ..कही आप मुझे किसी आश्रम में तो नही भेज देंगी ..'
.'अरे नही "मीता बोली
बारिश बहुत तेज है और यहाँ तुम्हे अब खाने को भी क्या मिलेगा ..तुम मेरे साथ चलो यही पास ही मेरा घर है खा पी के फिर अपनी राह चली जाना ".....भूखे को अपनी बातों में फंसाना कौन सा मुश्किल काम था ...वो लड़की उसके साथ आ गयी ।

कार में उसको बिठाकर मीता घर की तरफ़ चल पड़ी ...लड़की डरी सहमी सी कार में बैठी थी ,यह देख के मीता ने उसको कहा घबराने की जरुरत नही है ..मैं भी औरत हूँ तुम्हे मुझ से कोई नुकसान नहीं होगा |मानव दिल की थाह कौन नाप सका है जो वही मासूम लड़की नाप लेती ...उधर मीता कार चलाते हुए सोच रही थी यह गरीब लड़की भी जान ले कि अमीर लोगो के पास भी दिल होता है वो भी मदद करना जानते हैं ...क्या करेगी दो रोटी खायेगी अपनी कहानी सुना के चली जायेगी ,पर इस से जो मेरे पास कहानी बनेगी उसकी "'वाह वाही ''तो अनमोल है .....यह सोचते सोचते वह घर के पास आ गई ...कार बरामदे में खड़ी करके उसने लड़की को बहुत प्यार से अन्दर आने को बोला .. वो मासूम लड़की अन्दर आ के उसके घर की सजावट देख के और भी सहम गई .. और वो सहम के एक कोने में खड़ी हो गयी

अरे बाबा !!"'डरो मत ..आराम से रहो "" यह कह कर उसने अपनी नौकरानी को आवाज़ दी ... उस लड़की के लिए खाना ले के आए और उसके लिए चाय ले आए !
अरे !!!!""तुम्हारे तो सब कपड़े भीगें हैं ''..ठहरो जब तक खाना आता है तुम यह मेरा पुराना सलवार कमीज पहन लो ..
लड़की बोली नहीं नहीं बस आप खाना दे दो मैं यूं ही ठीक हूँ ....अरे !नही नही तुम्हे सर्दी हो जायेगी कह कर उसने उसको जबरदस्ती अपने पुराने कपड़े थमा दिए| वह अपनी दयालुता दिखाने का कोई मौका नही छोड़ना चाहती थी और जब वह उसका पुराना सूट पहन के आई तो मीता उसको देख के हैरान हो गई ,उसका रूप तो और निखर आया था जरुर यह किसी भले घर की लड़की है ..शायद किन्ही बुरे हालातों में फंस कर इस बेचारी की यह हालत हो गई है ...मीता के दिल में उस लड़की के बारे में जानने की उत्सुकता बढती जा रही थी ...वह जल्द से जल्द उसके बारे में सब जान लेना चाहती थी

अभी वो उस से कुछ पूछना शुरू करती कि....साहिल कमरे में आ गया .. एक अजनबी को देख कर हैरानी से वही खड़ा रह गया ...बोला यह कौन?.मीता एक दम से बोली यह मेरी मेरी जान पहचान की है .आज अचानक रास्ते में मिल गई !"".. ओह्ह....ठीक है अच्छा ज़रा तुम मेरे साथ दूसरे कमरे में आ सकोगी ..मुझे तुमसे कुछ कहना है .... साहिल ने मीता से कहा...

मीता उस लड़की से बोली तुम बैठो ..मैं आती हूँ पाँच मिनिट में ...कह कर वो साहिल के पीछे-पीछे आ गयी ..साहिल ने कहा ""अब बताओ यह कौन है ?"" मैंने तो इनको पहले कभी नही देखा .और बहुत मासूम सी लग रही है ,कुछ डरी सहमी सी भी है ,पूरी बात बताओकि यह कहाँ से आई हैं !!
मीता ने सब बात बताई ...साहिल ने हँस के कहा .."'वाह !! तुम पागल हो इतना तो मैं जानता था ..पर यह भी कर लोगी सिर्फ़ वाह-वाही के लिए .. यह नही जनता था""! .फ़िर शरारत से हंस के बोला वैसे तुम इसको यहीं रखने वाली हो या खाना खिला के इसकी कहानी सुन के यहाँ से रफा दफा कर दोगी, वैसे किसी भले घर की लगती है और बहुत सुंदर भी है . ..मैं तो कमरे में आ के ठगा सा खड़ा रह गया ... उसको देखते हुए जैसे उसको ईश्वर ने फ़ुरसत में बनाया है ....सोच लो यदि तुम उस को यहाँ रखने की सोच रही हो, रात तक तो कुछ भूल ना कर बैठो कह कर शरारत से मुस्कुराने लगा !
""अजीब इंसान हो तुम ""इतना कह कर ..मीता वापस कमरे में आ गयी .!"सुंदर ,,ठगा सा रह गया "..यह लफ्ज़ उसके कानो में गूंजने लगे . अब उसका दिमाग जैसे घड़ी की दो सुइयों की तरह साहिल की बातों पर अटक के रह गया था ,अब उसको उस लड़की के बारे में जानने में कोई दिलचस्पी नही रह गई थी !
सोचते सोचते उसका दिमाग़ भन्ना गया ... वो तेज़ी से उठी ,, कुछ पैसे उस लड़की के हाथ में थाम के जाने को बोल दिया और कपड़े बदल के ..दुबारा अच्छे से तैयार हो के साहिल के पास गयी !
साहिल ने पूछा क्या हुआ इतनी जल्दी सुन ली उसकी कहानी ..जाओ ,तुम सुनो मैं यही हूँ अभी कह कर वह फ़िर शरारत से मुस्करा दिया .. .
मीताने कहा कि वो लड़की नही रुकना चाहती थी .. मैने उसको कुछ पैसे दे के भेज दिया .. अब मैं ज़बरदस्ती तो उसको नही रोक सकती थी ना . यह कहते हुए वो मुस्करा के साहिल के सीने से लग गयी ... सुन कर साहिल चुप हो गया और धीरे से हँसने लगा |
उसने साहिल से पूछा आज बाज़ार में बहुत सुंदर से बूंदे देखे हैं .".कुछ पैसे दे आई हूँ और कुछ देकर लाने हैं ..."साहिल ने मुस्करा के उसको अपने सीने से लगा लिया और बोला...ले लेना ....तुम्हे मैंने कब किस चीज के लिए मना किया है ...
खिड़की पर पड़े गुलदान में रखे गुलाब मुस्करा रहे थे ,बाहर का समां बारिश होने से भीगा भीगा था ...और मीता साहिल के सीने से लगी अपने सवाल के जवाब में सिर्फ़ एक बात सुनना चाहती थी ... कि ... क्या वह सच में सुंदर है .....???????उतनी ही जिसको देखकर साहिल ठगा सा देखता रह गया था !

38 comments:

हेमन्त कुमार said...

बेहतर । आदर्शोन्मुख अभिव्यक्ति। आभार।

Udan Tashtari said...

बडए बहाव में -गज़ब बयानी!!

अनिल कान्त : said...

बहुत अच्छी कहानी रही....एकदम से पूरी पढ़ी जाने वाली

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

कहानी अच्छी है।
औरतें अपने दांपत्याधिकार में दखल की संभावना को भी बड़े खतरे के रूप में क्यों देखती हैं?

Arvind Mishra said...

औरत के अंतर्मन को उजागर करती एक बेहतरीन कृति -बहुत बहुत बधायी ! आप की कहानियाँ हर बार आश्वस्त करती हैं हैं की एक कवि ही नहीं आप में एक कुशल कथाकार भी छुपा है !

maithil said...

yah baat vilkul sachh hai ki ek aurt sapne me bhi apne dampaty jeevan me kisi halchal ko bardast nahi kar sakti. aur ye ki uska pati kisi aur ko dekh mugdh ho jaye. Is khatre ko lekar wah koi bhi wahwahi nahi chahegi.Ath yah kahani ytharth ko bayan karti hai. par kahani me ek baat khatki ki jab shahil ko is baat ka andaja hi nahi tha ki uski biwi kisi aise ko ghar la sakti hai to usko yah kaise pata ki mita use kewal uski kahani sunne ke liye lekar aayi hai.

सुशील कुमार छौक्कर said...

अंत तक बाँधे हुए अंर्तमन की उधेडबुन को दिखाती एक बेहतरीन कहानी।

Pankaj Mishra said...

बहूत खोब . गजब की कहानी अंत तक रोचकता बनी रही .

पंकज

कुश said...

कहानी का थोट अच्छा था.. पर अत्यधिक नाटकीयता ने उसको लील लिया.. आपमें क्षमता है.. उम्मीद है अगली बार आप निराश नहीं करेगी..

Mumukshh Ki Rachanain said...

अंत तक रोचकता द्वारे बांधे रखने वाली कहानी,
भावों को परिस्थितियां या आसन्न भय कब-कैसे परिवर्तित कर देता है, बहुत अच्छी तरह उकेरा है, आपने अपनी इस कहानी में..........अविश्वासी मर्द का दर्शन भी दे रही है, आपकी यह कहानी..........

बधाई.

Priya said...

sach bolu to badi post nahi padh paati samay ke abhaav ke kaaran...par ek baar to aapki kahani padhni shuru ki to jiyasa badhti gai.....aur aas pass ke charitra nazara aaye....man ko bha gai ye to

विनय ‘नज़र’ said...

दिल मैं सीधे समा जाने वाली लेखनी
---
तख़लीक़-ए-नज़र

pallavi trivedi said...

कहानी अच्छी है पर सोच रही हूँ क्या इतनी छोटी छोटी बातों से मन में खोने का डर हावी हो जाता है.

vikram7 said...

अंत तक रोचकता लिये नरी के अंर्तमन को दर्शाती अच्छी कहानी

ओम आर्य said...

बेहतरीन प्रस्तुति ..........आपकी लेखनी की विविधता को सलाम

अर्शिया said...

Man ki gahree thaah lee hai aapne.
( Treasurer-S. T. )

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत ही बेहतरीन कहानी. शुभकामनाएं.

रामराम.

PREETI BARTHWAL said...

अच्छी कहानी है।

विपिन बिहारी गोयल said...

बेहतरीन

संगीता पुरी said...

बहुत सुंदर कहानी .. वास्‍तविक दुनिया में नारी की लाचारी दिख ही जाती है!!

mehek said...

nari mann ke kisi kone mien chupa khone ka wo darr,bahut sunder aur sahajta se bayan hua hai.bahut khub.

शरद कोकास said...

कहानी अच्छी है लेकिन थोड़ा विस्तार और चाहिये क्योकि तीनों पात्रों के मनो भावों का वर्णन तो आपने किया ही नही । ऐसा लगता है अंत ज़ल्दबाज़ी मे कर दिया गया है । -शरद कोकास,दुर्ग

Nitish Raj said...

अच्छी कहानी पर पढ़ने में देर लगी।

रश्मि प्रभा... said...

bahut hi achhi kahani

दिगम्बर नासवा said...

ANT TAK ROCHAKTA BANI RAHI IS KAHAANI MEIN ...... AURAT KE ANTARMAN KO UKERTI LAJAWAAB KAHAANI HAI .....

मीनाक्षी said...

कहानी में स्त्री मन के कमज़ोर पक्ष को उभारा गया है..

अल्पना वर्मा said...

अच्छी लगी कहानी.स्त्री के मन में अपने दाम्पत्य जीवन में किसी के भी दखल से भय रहता ही है.चाहे वह सुन्दर हो या न हो.पति के प्रेम पर वह अपना अधिकार समझती है और कभी बाँटना नहीं चाहती.
आप ने एक स्त्री के मन की भावनाओं को कहानी में सुन्दर ढंग से प्रस्तुत किया.बधाई.

Nirmla Kapila said...

नारी सुलभ भावनाओं को बहुत सुन्दरता से कहानी के रूप मे लिखा है। पत्निसुलभ मन सदा हे पति के कुछ लुभावने शब्दों का मोहताज़ रहता है।जिसे इस कहानी के माधय्म से कहा है। बहुत बहुत बधाई।

Science Bloggers Association said...

Man ko bhigo dene waali kahanee.
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

महफूज़ अली said...

waise yeh baat to aapne ekdum sahi kahi hai...... ki...... औरत का दिल ईश्वर ने ऐसा बनाया है कि हर वक़्त प्यार के खुमार में डूबा रहता है कुछ नया खोजता सा ,कुछ नया रचता सा।

yeh waaqai mein sah ihai...... as true as death......

AUR aurat ke ek doosre paksh ko bhi aapne bahut hi khoobsoorti se ukera hai....... bahut hi bhaavpoorna kahani.......

Mrs. Asha Joglekar said...

और मीता साहिल के सीने से लगी अपने सवाल के जवाब में सिर्फ़ एक बात सुनना चाहती थी ... कि ... क्या वह सच में सुंदर है .....???????उतनी ही जिसको देखकर साहिल ठगा सा देखता रह गया था !
Is ek wakya me kahanee ka sar bhee de diya wah !

Reetika said...

Pyaar ek mard ke liye bandhan kyun hota hai ?? kya koi iska jawab de sakta hai kya ?

gargi gupta said...

ranju ji aap ki kahani dil ko chhu gai ...aap bhut achchha likhti hai

रंजना said...

Nari man ki durbaltaon ko bahut hi prabhavpoorn dhang se aapne apni is katha me aapne ukera hai..

Kathy is tarah buna hai ki rochkta poore samay bani rahti hai...

Prabhavshalee katha hetu aabhar.

डॉ .अनुराग said...

कुछ डर वक़्त के साथ घटते बढ़ते है...

संजय भास्कर said...

dil me utarti hui rachana
bhaut hi sunder hai

संजय भास्कर said...

dil me utarti hui rachana

neera said...

इतनी इन्सिक्युर होती हैं औरत? रंजू जी बड़ी सहजता से बता दिया..