
सर्दी का ...
घना कोहरा..
उसमें..
डूबा हुआ मन..
एक अनदेखी सी
चादर में लिपटा हुआ
और तेरी याद उस में
आहिस्ता से ,धीरे से
उस कोहरे को चीरती
यूँ मन पर छा रही है
जैसे कोई कंवल
खिलने लगा है धीरे धीरे
और आँखों में
एक चाँद...
मुस्कराने लगा है ...
रंजना (रंजू )भाटिया
"सन्डे विदआउट सन शाइन "..इंडिया गेट का नजारा ३ जनवरी २०१० को मेरे कैमरे की नजर से ..दिल्ली की सर्दी ....
३ जनवरी २०१०