बदली दर्द की बरस कर पलकों पर रह गई बात दिल की फ़िर होंठों तक आ कर रह गई
टूटी न खामोशी आज भी पहली रातों की तरह ख्वाव उजले लिये यह रात भी काली रह गई बेबसी धडकी बेचैन तमन्ना बन कर दिल में तन्हा सांसे फ़िर से तन्हाई में घुल कर रह गई खुल के इजहार करू न आया वह बहारों का मौसम आज खामोशी मेरी मुझे खिंजा सी चुभ कर रह गई
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Monday, January 16, 2012
Wednesday, November 02, 2011
कई सदियों से ...
कई सदियों से ...
बंद पलकों में
ठिठके पड़े हैं कुछ आंसू के मोती
लरजते लबों पर ..
थरथरा रही है
कोई बात अनकही...
अपनी कांपती उँगलियों पर
महसूस कर रही हूँ
तेरे उँगलियों की गर्माहट
एक हलकी सी जुम्बिश
तेरे लबों की
जो आ कर थमी है
गर्दन के कोने पर ..
लगता है आज ....
कई सदियों से एक हिम नदी
जिसमें जमे हुए थे
कुछ पुराने लम्हों के अवशेष
वो तेरे इस कद्र करीब होने से
अपनी बात तुझ तक रिस कर
अपनी मंजिल पा ही जायेंगे
और सागर जैसे तेरे दिल में
समां जायेंगे ...........
बंद पलकों में
ठिठके पड़े हैं कुछ आंसू के मोती
लरजते लबों पर ..
थरथरा रही है
कोई बात अनकही...
अपनी कांपती उँगलियों पर
महसूस कर रही हूँ
तेरे उँगलियों की गर्माहट
एक हलकी सी जुम्बिश
तेरे लबों की
जो आ कर थमी है
गर्दन के कोने पर ..
लगता है आज ....
कई सदियों से एक हिम नदी
जिसमें जमे हुए थे
कुछ पुराने लम्हों के अवशेष
वो तेरे इस कद्र करीब होने से
अपनी बात तुझ तक रिस कर
अपनी मंजिल पा ही जायेंगे
और सागर जैसे तेरे दिल में
समां जायेंगे ...........
Wednesday, February 14, 2007
सपनो का आकाश चाहिए....

मेरे दिल की ज़मीन को सपनो का आकाश चाहिए,
उड़ सकूँ या नही ,किंतु पँखो के होने का अहसास चाहिए......
मौसम दर मौसम बीत रही है यह जिंदगानी ,
मेरी अनबुझी प्यास को बस एक "मधुमास" चाहिए.
लेकर तेरा हाथ, हाथो में काट सके बाक़ी ज़िंदगी का सफ़र.
मेरे डग-मग करते क़दमो को बस तेरा विश्वास चाहिए.
साँझ होते ही तन्हा उदास हो जाती है मेरी ज़िंदगी,
अब उन्ही तन्हा रातो को तेरे प्यार की बरसात चाहिए.
कट चुका है अब तो मेरा" बनवास" बहुत
मेरे बनवास को अब "अयोध्या का वास" चाहिए. !!
उड़ सकूँ या नही ,किंतु पँखो के होने का अहसास चाहिए......
मौसम दर मौसम बीत रही है यह जिंदगानी ,
मेरी अनबुझी प्यास को बस एक "मधुमास" चाहिए.
लेकर तेरा हाथ, हाथो में काट सके बाक़ी ज़िंदगी का सफ़र.
मेरे डग-मग करते क़दमो को बस तेरा विश्वास चाहिए.
साँझ होते ही तन्हा उदास हो जाती है मेरी ज़िंदगी,
अब उन्ही तन्हा रातो को तेरे प्यार की बरसात चाहिए.
कट चुका है अब तो मेरा" बनवास" बहुत
मेरे बनवास को अब "अयोध्या का वास" चाहिए. !!
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