यूँ ही जाने -अनजाने
महसूस होता है
रिश्तो की गर्मी
शीत की तरह
जम गई है ...
न जाने कहाँ गई
वह मिल बैठ कर
खाने की बातें
वह सोंधी सी
तेरी -मेरे ....
घर की सब्जी
रोटी की महक सी
मीठी मुस्कान ....
अब तो रिश्ते भी
शादी में सजे
बुफे सिस्टम से
सजे सजाये दिखते हैं
प्यार के दो मीठे बोल भी
जमी आइस क्रीम की तरह
धीरे से असर करते हैं
कहने वाले कहते हैं
कि घट रही धीरे धीरे
अब हर जगह की दूरी
पर क्या आपको नही लगता
कि दिलो के फासले अब
और महंगे .....
और बढ़ते जा रहे हैं??
रंजू ..........
