आज संगीत दिवस है ..तो आज सुनते हैं यह प्यारा सा गाना सोना की आवाज़ में .एल्बम का नाम है बोलो न .
अभी नही आना सजना
मोहे थोड़ा मरने दे
इन्तजार करने दे
अभी नही आना सजना
भेजियो संदेसा
आप नही आना
थोड़े दूर रह कर मोहे तरसना
अभी तो मैं चाहूँ
सारी सारी रात जगना
अभी नही आना सजना २
रुक रुक आना धीरे धीरे चलना
भूलना डगरिया रास्ते बदलना
नही अभी मोहे नही है गरवा लगना
अभी न जगाओ मन ही मन सपना
अभी संग मुख न लाओ मुख अपना
अभी तो मैं चाहूँ आस लगाये रखना
अभी नही आना सजना ....नही नही आना
अभी आए तो दर नही खोलेंगे
आवाज़ दोगे तो हम नही बोलेंगे
Pages
Showing posts with label गाना. Show all posts
Showing posts with label गाना. Show all posts
Saturday, June 21, 2008
Tuesday, June 17, 2008
मेरे लबों पर सहरा की प्यास रहने दे
मेरे लबों पर सहरा की प्यास रहने दे
इस दिल की लगी को यूं ही जलती बुझती रहने दे
मैं हूँ जो उदास तो क्यों तडपता है तेरा दिल
अभी कुछ देर और मेरे पास अपने अहसास रहने दे
मत देख कितने दर्द से भरा है मेरा दिल
उदास लबों पर यूं ही हँसी का लिबास रहने दे
ना नजरों से पिला तू मुझको प्यार के प्याले
मेरे नसीब में है जो खाली गिलास रहने दे
नही उम्मीद कि अब कोई थामेगा हाथ मेरा
मेरी आंखों में अब भी मंजिल की तलाश रहने दे !!
यह रचना मेरे द्वारा लिखित है और श्वेता मिश्र द्वारा गायी गई है जल्द ही मेरी लिखी कुछ रचनाओं की सी डी ऋषि जी द्वारा गयी भी आने की उम्मीद है आपको यह कैसी लगी जरुर अपने विचार यहाँ दे ..शुक्रिया
--
Sunday, May 25, 2008
तेरे आने की जब खबर महके
तेरे आने की जब खबर महके
तेरी खुशबू से सारा घर महके
शाम महके तेरे तस्वुर से
शाम के बाद फ़िर सहर महके
रात भर सोचता रहा तुझको
जहनों दिल मेरे रात भर महके
याद आए तो दिल मुरबर हो
दीद हो जाए तो नज़र महके
वो घड़ी दो घड़ी जहाँ बैठे
वह जमीन महके वह शजर महके [जगजीत सिंह की गायी एक और खूबसूरत गजल ]
तेरी खुशबू से सारा घर महके
शाम महके तेरे तस्वुर से
शाम के बाद फ़िर सहर महके
रात भर सोचता रहा तुझको
जहनों दिल मेरे रात भर महके
याद आए तो दिल मुरबर हो
दीद हो जाए तो नज़र महके
वो घड़ी दो घड़ी जहाँ बैठे
वह जमीन महके वह शजर महके [जगजीत सिंह की गायी एक और खूबसूरत गजल ]
Wednesday, May 21, 2008
मौसम को इशारों से बुला क्यों नही लेते...
मौसम को इशारों से बुला क्यों नहीं लेते
रूठा है अगर वो तो मना क्यों नहीं लेते
दीवाना तुम्हारा कोई गैर नहीं
मचला भी तो सीने से लगा क्यों नही लेते
ख़त लिखकर कभी और कभी ख़त को जलाकर
तन्हाई को रंगीन बना क्यों नही लेते
तुम जाग रहे हो मुझको अच्छा नही लगता
चुपके से मेरी नींद चुरा क्यों नही लेते
मौसम को इशारों से बुला क्यों नही लेते [जगजीत सिंह .]..दिल्ली का मौसम तो वैसे ही सावन आया भूल के हो गया है ..इस मौसम में यह दो गाने अच्छे लगे आप भी सुने :)
मैनू तेरा शाबाब ले बैठा .. [जगजीत सिंह .].
रूठा है अगर वो तो मना क्यों नहीं लेते
दीवाना तुम्हारा कोई गैर नहीं
मचला भी तो सीने से लगा क्यों नही लेते
ख़त लिखकर कभी और कभी ख़त को जलाकर
तन्हाई को रंगीन बना क्यों नही लेते
तुम जाग रहे हो मुझको अच्छा नही लगता
चुपके से मेरी नींद चुरा क्यों नही लेते
मौसम को इशारों से बुला क्यों नही लेते [जगजीत सिंह .]..दिल्ली का मौसम तो वैसे ही सावन आया भूल के हो गया है ..इस मौसम में यह दो गाने अच्छे लगे आप भी सुने :)
मैनू तेरा शाबाब ले बैठा .. [जगजीत सिंह .].
Sunday, May 18, 2008
तुम्हारे शहर का मौसम बड़ा सुहाना लगे ,मैं एक शाम चुरा लू अगर बुरा न लगे
तुम्हारे शहर का मौसम बड़ा सुहाना लगे ,मैं एक शाम चुरा लू अगर बुरा न लगे
मुन्नी बेगम का गाया यह गाना बेहद खूबसूरत लगता है मुझे ..आपको कैसा लगा ..बताये सुन के ..क्या आपका दिल चुराया इस गाने ने :)
मुन्नी बेगम का गाया यह गाना बेहद खूबसूरत लगता है मुझे ..आपको कैसा लगा ..बताये सुन के ..क्या आपका दिल चुराया इस गाने ने :)
Thursday, May 15, 2008
जो तू आन्खियो के सामने नही रहना ते बीबा मेरा दिल मोड़ दे
जो तू आन्खियो के सामने नही रहना ते बीबा मेरा दिल मोड़ दे ..एक सूफी गीत जो सीधा दिल में उतर जाता है
बताये क्या मैंने झूठ कहा :)
बताये क्या मैंने झूठ कहा :)
Wednesday, May 14, 2008
यह मेरा दीवानापन है ...
यह गाना मुझे बहुत पसंद आया ..... है तो पुराना पर नए में भी यह उतना ही खूबसूरत लगा है जितना अपने पुराने रूप में .....आपको कैसा लगा बताये जरुर
Subscribe to:
Posts (Atom)