Wednesday, June 24, 2026

क्या पढ़ाई बच्चों की जान से कीमती है

 क्या पढ़ाई बच्चों की जान से ज़्यादा कीमती हो गई है?


लखनऊ की दर्दनाक घटना ने एक बार फिर दिल को झकझोर दिया। हर बार यही सवाल मन में उठता हैक्या शिक्षा के नाम पर हम अपने बच्चों की सुरक्षा को भूलते जा रहे हैं? क्या पढ़ाई बच्चों की जान से भी ज़्यादा कीमती हो गई है?


मुझे यह जानने की उत्सुकता हुई कि क्या विदेशों में भी कोचिंग सेंटर है और उनके क्या रूल और क्या कानून है तो गूगल के सौजन्य से यह जानकारी मिली


सच यह है कि कोचिंग सेंटर केवल भारत में ही नहीं, बल्कि दुनिया के लगभग हर देश में हैं। दक्षिण कोरिया में इन्हें हागवॉन, जापान में जुकू और अमेरिका, कनाडा तथा ब्रिटेन में लर्निंग सेंटर या टेस्ट प्रेप इंस्टीट्यूट कहा जाता है। वहाँ भी बच्चे अतिरिक्त पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए इन संस्थानों में जाते हैं।


लेकिन असली फर्क कोचिंग के होने या न होने में नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर अपनाए जाने वाले नियमों में है।


विदेशों में कोई भी व्यक्ति अपनी मर्जी से किसी बेसमेंट, तंग गली या रिहायशी मकान में कोचिंग सेंटर नहीं खोल सकता। वहाँ के कानून इतने सख्त होते हैं कि केवल उन्हीं इमारतों में शैक्षणिक संस्थान चल सकते हैं जिन्हें सरकार और स्थानीय प्रशासन से विशेष अनुमति मिली हो।


किसी भी कोचिंग सेंटर को शुरू करने से पहले फायर सेफ्टी, इमरजेंसी एग्जिट, वेंटिलेशन, भवन की क्षमता और सुरक्षा मानकों की विस्तृत जांच होती है। हर कमरे में कितने बच्चे बैठ सकते हैं, इसकी सीमा तय होती है और उसका सख्ती से पालन कराया जाता है। नियम तोड़ने पर भारी जुर्माना, लाइसेंस रद्द होने और यहां तक कि जेल की सजा तक का प्रावधान होता है।


हमारे देश में भी नियमों की कमी नहीं है। कागज़ों पर सब कुछ मौजूद है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल नियम बनाने का नहीं, उन्हें लागू करने का है। अक्सर कार्रवाई किसी हादसे के बाद शुरू होती है। कुछ दिन सख्ती दिखती है, फिर सब पहले जैसा हो जाता है। और अगली किसी हादसे का इंतज़ार शुरू हो जाता है।


हर हादसे के बाद शोक संदेश लिखे जाते हैं, जांच समितियाँ बनती हैं, लेकिन उन मासूम बच्चों की जिंदगी वापस नहीं आती जो अपने सपनों के साथ घर से निकले थे।


शिक्षा का उद्देश्य बच्चों का भविष्य बनाना है, उन्हें खतरे में डालना नहीं। कोई भी डिग्री, कोई भी परीक्षा और कोई भी करियर किसी बच्चे की जिंदगी से बड़ा नहीं हो सकता।


आज जरूरत सिर्फ नए नियमों की नहीं, बल्कि ऐसे सिस्टम की है जहाँ बच्चों की सुरक्षा को सबसे पहली प्राथमिकता माना जाए। कही भी कोचिंग सेंटर बिना सुरक्षा नियमों के न खोले जाएं 


आखिरकार, पढ़ाई जरूरी है, लेकिन बच्चों की जान उससे कहीं ज्यादा जरूरी है। भविष्य बचेगा तो कुछ आगे होगा । कल से लखनऊ का यह अग्निकांड देख कर बहुत ही मन खराब हो रहा है । पिछले दिनों में इतने हादसे सुने है इस तरह के कि लगता है देश में कोई कानून नियम नहीं हैं।

#LucknowFire 

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