Monday, July 29, 2013

नए सपने

बदमाश मौसम
...........सावन भादों
बदतमीज बरसती थमती
.............बारिश
नालायक कमबख्त दिल की
..........गुस्ताखियाँ
बहकती आँखों के
...........बेसबब इशारे
तेज तूफ़ान हवाओं के साथ
...........थिरकते बहकते उड़ते मन
पुराने संगीत की धुन पर
............बुन रहे हैं ज़िन्दगी की नयी परिभाषा ,

.ज़िन्दगी यूँ ही रोज़ बदलती है नए रंग ..और खुली आँखों से बुनते हैं न जाने कितने दिल नए सपने इसके रंग  में .....# रंजू ...

11 comments:

अरुन अनन्त said...

आपकी यह रचना कल मंगलवार (30-07-2013) को ब्लॉग प्रसारण पर लिंक की गई है कृपया पधारें.

Anju (Anu) Chaudhary said...

ये बदलाव ही तो जिंदगी है रंजू दी

sushmaa kumarri said...

सुन्दर भावो को रचना में सजाया है आपने.....

ब्लॉग बुलेटिन said...

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन भारत मे भी होना चाहिए एक यूनिवर्सल इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

ताऊ रामपुरिया said...

जबरदस्त ...बेहतरीन.

रामराम.

Ranjana verma said...

खुबसूरत रचना !!

Ranjana verma said...

खुबसूरत रचना !!

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत खूब .... :):)

Arvind Mishra said...

इन दिनों बदतमीज शब्द अचानक बहुत प्रचलन में है -झलक दिखला जा से लखनऊ के प्रसिद्ध मिठाई शाप छप्पन भोग और कुछ मेरी कलम से तक ..लगता है अब जल्दी ही यह शब्द भी अपना मूल अर्थ खो देगा :-)

प्रवीण पाण्डेय said...

नित नये सपने पुराने स्थान हड़प लेते हैं, नये स्थानों की खोज और विस्तार में जीवन।

मुकेश कुमार सिन्हा said...

khubsurat shabdo se saji jindagi ..:)