Friday, March 29, 2013

कहो सच है न ...:)

बुन नहीं सकते
एहसासों को
भावनाओं को
और ख्वाइशों को
किसी
कल पुर्जे से ,संबंधों से ...
क्यों कि
दिल के यह गीत
जो बुने जातें हैं रेशम से
किसी "जुलाहे सी रूह" से
वह अब भी
इस मशीनी युग में
किसी मशीन से बुनना
मुमकिन नहीं !!!

कहो सच है न ...:)

18 comments:

कालीपद "प्रसाद" said...

बिलकुल सच है
latest post हिन्दू आराध्यों की आलोचना
latest post धर्म क्या है ?

vandan gupta said...

आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा शनिवार (30-3-2013) के चर्चा मंच पर भी है ।
सूचनार्थ!

मुकेश कुमार सिन्हा said...

koshish kar ke dekho.. shayad sambhav hai..:)

अरुन अनन्त said...

कोशिश कीजिये कदाचित संभव हो सके.

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

बहुत सुंदर भावों की अभिव्यक्ति.....
RECENT POST: होली की हुडदंग ( भाग -२ )

शिवम् मिश्रा said...

बिलकुल सच है जी ... :)


आज की ब्लॉग बुलेटिन 'खलनायक' को छोड़ो, असली नायक से मिलो - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

Manav Mehta 'मन' said...

बढ़िया

Tamasha-E-Zindagi said...

बहुत सुन्दर रचना | पढ़कर ह्रदय गदगद हो उठा | आभार

कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
Tamasha-E-Zindagi
Tamashaezindagi FB Page

Kajal Kumar's Cartoons काजल कुमार के कार्टून said...

वाह जी बधिया

मुकेश कुमार सिन्हा said...

sahi kaha arun jee ne
koshish karne me kya jata hai..

Pratibha Verma said...

बहुत सुन्दर....होली की हार्दिक शुभकामनाएं ।।
पधारें कैसे खेलूं तुम बिन होली पिया...

Rajendra kumar said...

बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति,आभार.

प्रवीण पाण्डेय said...

बुनना रूह से..गहरा..

Maheshwari kaneri said...

बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति,.

Anju (Anu) Chaudhary said...

बहुत खूब .....सच ही तो

rashmi ravija said...

सच ही तो है ..
सुन्दर रचना

Akhil said...

sau pratishat sahi...rooh se bune gaye 'Tane' ke zaroorat hai is yug men.

संजय भास्‍कर said...

हमेशा की तरह ये पोस्ट भी बेह्तरीन है
कुछ लाइने दिल के बडे करीब से गुज़र गई....