Tuesday, May 01, 2007

क्या -क्या ना मुझे याद आया ..


देखा जब खिलते हुए फूलो को क्या -क्या ना मुझे याद आया
वो तेरा प्यार से मुझे पुकारना वो तेरा प्यार का साया

छ्लका जो जामय का तेरी महफ़िल में
मुझे तेरी नज़रो का ख़ुद की नज़रो से मिलना याद आया

देख के रोनक-ए -बहार फ़िज़ा में महकती सी ख़ुश्बू
वो तेरा प्यार से मेरे लबो को चूमना याद आया

देखा जो सुरमई शाम का ढलता आँचल
मुझे तेरी बाहों में अपना सिमाटना याद आया

देखा जो मेहन्दी के फूलो को अपने हाथ में महकते
मुझे तेरा ख़ुद से किया गया हर वादा-ए -वफ़ा याद आया !!


ranju
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