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Sunday, August 05, 2012

दोस्ती का रिश्ता

तुम्हारा मेल दोस्ती की हद को छू गया
दोस्ती मोहब्बत की हद तक गई
मोहब्बत इश्क की हद तक
और इश्क जनून को हद तक ॥

अमृता इमरोज़ की दोस्ती पर कही यह पंक्तियाँ दोस्ती की परिभाषा को और भी अधिक गहरा रिश्ता बना देती है ...दोस्ती लफ्ज़ ही ऐसा है जो दिल के अन्दर तक अपना वजूद कायम कर लेता है यदि दोस्ती सच्ची और गहरी है तो .... वैसे तो सभी रिश्ते अपना अपना स्थान ज़िन्दगी में बनाए रखते हैं ...पर दोस्ती का रिश्ता सबसे अलग होता है क्यों कि यह बना बनाया नहीं मिलता हमें इसको बनाना पड़ता है और फिर यदि दोनों और से दिल मिल जाए तो यह ता -उम्र निभाया जा सकता है ....कोई खून का रिश्ता नहीं होता यह फिर भी बहुत प्यारा और हर दिल अजीज होता है ..

दोस्ती का रिश्ता बहुत नाजुक होता है ,एक जरा सी ग़लतफ़हमी इस रिश्ते को तोड़ के रख देती है और जहाँ विश्वास नहीं रहता वहां यह यह रिश्ता भी आगे नहीं पनप सकता है ...बड़े बड़े वैज्ञानिकों ने यह साबित कर दिया है कि जिनके दोस्त होते हैं वह एक लम्बी स्वस्थ उम्र जीते हैं ...आखिर कहीं तो तो कोई हो जिस से आप अपने दिल की बात बेहिचक कह सके सुन सकें ..जिनके पास दोस्त नहीं वह बहुत अकेले और तन्हा होते हैं ..अब यह आपके ऊपर है कि अपने स्वभाव से आप कैसे दोस्त बनाते हैं और उस दोस्ती को कैसे निभा पाते हैं ...
दोस्ती जब भी करें दिल से करे और उस में विश्वास बनाये रखे ...अगर आप चाहते हैं कि आपका दोस्ती का रिश्ता कायम रहे तो एक दूजे की निजी बातें अपने तक ही रखे उसको सार्वजनिक न करें ..."इगो "का दोस्ती में कोई स्थान नहीं है ..यह दोस्ती को तोड़ देता है जहाँ अहम् है वहां दोस्ती आगे नहीं बढ़ सकती है ...दोस्ती की परिभाषा में एक दूजे के सुख दुःख बाँटना भी आता है जहाँ तक संभव हो सके एक दूजे का सुख दुःख बांटने की कोशिश करनी चाहिए ...पर यह ध्यान रहे कि हर व्यक्ति की अपनी एक निजी ज़िन्दगी होती है उस में अधिक दखल अंदाजी न हो जितना स्पेस आप एक दूजे को देंगे उतनी दोस्ती अधिक निभेगी ..यह हर रिश्ते के लिए जरुरी है ..कि हर कोई अपनी मर्जी से जीए ...हाँ इस बात का ध्यान हमेशा रहे कि सच्ची दोस्ती वही है जब लगे कि दोस्त गलत रास्ते पर जा रहा है तो उसको एक बार कम से कम सुधारने की बताने की  कोशिश जरुर करें ...यह बात आपके साथ भी लागू होती है यदि आपका दोस्त आपकी कोई गलती को समझ रहा है और उसको समझाने कि कोशिश करता है तो उसकी बात समझे ....

दोस्ती को मजबूत बनाए रखने के लिए कोई गलती खुद से महसूस करे तो उसी वक़्त उसको समझ कर एक दूजे से माफ़ी मांग ले और बात चीत बंद न करें ,क्यों कि जहाँ आपसी बात चीत कम हो जाती है वहां रिश्ता टूटने में अधिक देर नहीं लगती है ...एक दूजे के समय की  कद्र करें ...यह थी कुछ दोस्ती की बातें जिनको आप दिल से निभाएंगे तो दोस्ती गहरी रहेगी और लम्बी चलेगी ..किसी भी छोटी सी ग़लतफ़हमी की वजह से इस खूबसूरत दोस्ती को न खोने दे .|

रंजू भाटिया