दिए तेरी बातो ने कई दर्द मुझे यूं बहलाने से
लगते हैं अब तेरे कर्मों इनायत भी बेगाने से
तलाश करते रहे ना जाने क्या हम तेरी आँखो में
दिल टूटा जब वहाँ दिखे अक्स अपने ही अनजाने से
बदल गये तुम बदलती हुई फ़िज़ा की तरह फिर से
हम अब भी खड़े हैं उसी मोड़ पर खोए हुए वीराने से
लिख के भेजे हर पल कई कोरे ख़त तुझको हमने
तेरी चुप्पी के जवाब कर गये हमे और भी दीवाने से
बैठे रहे महफ़िल में बस चुपचाप देखते हुए तुझे
कि बना न ले लोग कहीं किस्से यूं ही मुस्कराने से !!
लगते हैं अब तेरे कर्मों इनायत भी बेगाने से
तलाश करते रहे ना जाने क्या हम तेरी आँखो में
दिल टूटा जब वहाँ दिखे अक्स अपने ही अनजाने से
बदल गये तुम बदलती हुई फ़िज़ा की तरह फिर से
हम अब भी खड़े हैं उसी मोड़ पर खोए हुए वीराने से
लिख के भेजे हर पल कई कोरे ख़त तुझको हमने
तेरी चुप्पी के जवाब कर गये हमे और भी दीवाने से
बैठे रहे महफ़िल में बस चुपचाप देखते हुए तुझे
कि बना न ले लोग कहीं किस्से यूं ही मुस्कराने से !!
