Showing posts with label छोटी कवितायेँ. Show all posts
Showing posts with label छोटी कवितायेँ. Show all posts

Monday, July 05, 2010

चंद लफ्ज़ कुछ यूँ ही


रेशमी सपने भी
आंसू के संग बह जाते हैं
वीरान आँखों में
जब यादो के
लम्हे मुस्कारते हैं
****************


खुद को बहलाने के
अब सब बहाने भी
नाकाम हो चले
जब से दिल ने जाना
कि हर साथ चलने वाला
हमसफर नहीं होता !!
*******************
हकीकत में
ख्वाब
एक फ़साना है
एक साया है दिल में
और उसका चेहरा
खुद बनाना है !!!

रंजना (रंजू ) भाटिया