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Wednesday, June 25, 2008

सच के रंग अलग अलग

जिंदगी कई रंग से में ढली है और दिल न जाने क्या क्या ख्याल बुनता रहता है ..वही ख्याल हैं यह कुछ लफ्जों की जुबान

सच के रंग


कभी उतार कर
अपने चेहरे से नकाब
ज़िंदगी को जीना सीखो
मिल जायेगी राह
किसी मंजिल की
बस सच से जुड़ना सीखो..



चेहरे का नूर
छलक उठा
जब भी याद आया
तेरे होंठों की मोहर का
अपनी गर्दन पर लगना ..


जुस्तजू
तेरे मीठे बोलो
तेरी प्यारी सी छवि
अपन वजूद पर
फैली हुई तेरी खुशबु
बस एक ओक में भरूँ
और चुपके से पी जाऊं ..


खामोशी

तेरे दिल की अन्तर गहराई से
मेरी नज़रों से दिल में उतरती ..


आदत
साँस लेने की
टुकडों में जीने की
वक्त बीतने की
टूट कर फ़िर से जुड़ने की
शायद जिंदगी कहलाती है ..

तेरा साथ
झूठे रेशमी धागों में
कसा हुआ एक रिश्ता
उपर से हँसता हुआ
अन्दर ही अन्दर दम तोड़ रहा है !!

Wednesday, June 11, 2008

कुछ यूं ही ....क्षणिकायें


1.गूंगी
मेरी आवाज़
अब ख़ुद मुझसे
पराई हो गयी है
इस भीड़ भरी दुनिया में
बेजान सी हो कर
ख़ुद को ही गूंगी कहती हूँ !!

2.ज़िंदगी

डगमग डगमग सी
बहकी है चाल मेरी
तू ही मुझे संभाल ले
तुझसे हो तो सीखा है
मैंने चलना और
आगे बढ़ाना !!

3 )सन्नाटा
तेज़ झोंको में चलना
तेरे बस की बात नही है
धीमी हवा का बहता सन्नाटा
यही कह के आगे बढ़ गया !!

4 )बारिश

बारिश की पहली बूँदे
तपते दिल पर यूँ गिरी हैं
कि सारा दर्द उबलकर
आँखो से टपकने लगा है !!

5:)इश्तहार
ज़िंदगी न जाने क्यों कभी कभी
इक इश्तेहार सी नज़र आती है
अन्दर दर्द के आंसू में लिपटी
पर बाहर से मुस्कराती है

6)वक्त

जो बीत गया
वह याद नही
आने वाले कल की
किसी को ख़बर नहीं
सच तो बस 'आज' है
और इस वक्त
तुम मेरे साथ हो!!