
तेरे मेरे बीच
तेरे मेरे बीच
एक दुआ
एक सदा
मेरी बेखुदी
तेरी बेरूख़ी
चटका हुआ आईना
काँपता पीले पत्ते सा
फिर भी यह रिश्ता
जन्म तक
यूँ ही चलता रहेगा !!
साथ
जब मैं उसके साथ नही होती
तो वह मुझे
हर श्ये में तलाश करता है
पहरों सोचता है मेरे बारे में
और मिलने की आस करता है
पर जब मैं मिलती हूँ उस से
तो वह तब भी कुछ
खोया सा उदास सा
न जाने क्यों रहता है !!
इन्द्रधनुष
सात रंगो से सज़ा
कोई नशीला गीत
दिखता हर रंग में
बस एक ही लफ़्ज़
प्रीत ॥
रिश्ता
रूह से रूह का
एक बेनाम सा
पर दिल की अन्तस
गहराई में डूबा
क्या ज़रूरी है
इस को कोई नाम देना ॥
प्यार
क्यों आज हवा
हर साँस लगती है अपनी
हर फूल ख़ुद का
चेहरा-सा लगता है
मन उड़ रहा है
कुछ यूँ ख़ुश हो के
जैसे इच्छाओं ने
पर लगा लिए हैं
और रूह आज़ाद हो के
तितली हो गई है
एक बोल
दुनिया के इस शोर में
बस चुपके कह देना
प्यार का एक बोल
पी लूंगी मैं
बंद आँखों से
जो कहा तेरी आंखों ने !!
मेरा वजूद
तेरे अस्तित्व से लिपटा
यूं घुट सा रहा है
कि एक दिन
तुझे ..
मैं तन्हा
छोड़ जाऊंगी !!
रंजना (रंजू )भाटिया
