Wednesday, September 05, 2012

आवारा ख्याल (२ )










एक छत मय्सर है
चाँद तारों की
और न जाने उस
ताने हुए शामियाने तले
कितनी और
ईंटगारों का 
शमियाना तानते हुए
उन्हें नाम
कई छतों का दे डाला
उस इंसान ने जो खुद
एक छत की तलाश में
भटकता रहा
जीवन के अंतिम पलों तक ...........(छोटा इमामबाडा में लगे रोशन चिन्ह   )छोटा इमामबाडा: इसका निर्माण नवाब मो. अली शाह ने किया था। इस इमारत की नक्काशी और झाड फानूस देखने लायक हैं।
आवारा ख्याल (१)

24 comments:

सदा said...

बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ... आभार

vandan gupta said...

वाह

दिगम्बर नासवा said...

दावा तो बहुत करता है इंसान पर जानता है अपनी हकीकत ... कुछ दे नहीं सकता ...

ANULATA RAJ NAIR said...

बहुत बढ़िया...

अनु

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

वाह,,,बहुत खूब,,,
लखनऊ की याद ताजा कराती,,,

बहुत बढ़िया बेहतरीन प्रस्तुति,,,,
RECENT POST,तुम जो मुस्करा दो,

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत खूब

अरुन अनन्त said...

वाह बहुत गहरी अभिव्यक्ति क्या बात है

Maheshwari kaneri said...

अच्‍छी प्रस्‍तुति ..

mark rai said...

बहुत बढ़िया...

प्रवीण पाण्डेय said...

बिना खम्भों का बड़ा भवन..

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि-
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल बृहस्पतिवार (06-09-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ...!
अध्यापकदिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ!

Sunil Kumar said...

बहुत ही सुंदर भावाव्यक्ति बधाई

kavita verma said...

sundar..

Vinay said...

:)

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संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल बृहस्पतिवार 06-09 -2012 को यहाँ भी है

.... आज की नयी पुरानी हलचल में ....इस मन का पागलपन देखूँ .

Dr. sandhya tiwari said...

बहुत ही सुंदर..........

Saras said...

sundar khayal ....

आनंद said...

अरे छोटा इमामबाड़ा तो लखनऊ में है आप वहीं की हैं क्या रंजू जी ?

रंजू भाटिया said...

@ नहीं आनंद जी ..मैं तो दिल्ली की हूँ ..वहां गयी तो बस दिल खो गया वहां की भूलभुलिया में :)

रंजू भाटिया said...

@ आनंद जी अभी तो सफ़र शुरू हुआ है ..बहुत बेहद पसंद आया यह शहर मुझे ..आगे आगे इस सफर में चलते रहिये ..लखनऊ कुछ तो करीब आजायेगा यादो में :)

मेरा मन पंछी सा said...

सुन्दर अभिव्यक्ति...
:-)

मेरा मन पंछी सा said...

सुन्दर अभिव्यक्ति...
:-)

मुकेश कुमार सिन्हा said...

chamakte roshandaan bata rahe ki jisne iske liye shabd diye wo bhi chamakte rahen....:)

संजय भास्‍कर said...

बेहतरीन प्रस्तुति