Thursday, October 20, 2011

कितना संक्षिप्त है प्यार और भूलने का अरसा कितना लम्बा।’’

पाब्लो नेरूदा एक कैदी की खुली दुनिया
अरुण माहेश्वरी
राधाकृष्ण प्रकाशन
मूल्य--१५० रूपये

पाब्लो नेरुदा जब 1971 में नोबेल पुरस्कार लेने के लिए पेरिस स्टाक होम पहुँचे थे, उसी समय हवाई अड्डे पर ढेर सारे पत्रकारों में से किसी ने उनसे पूछा : सबसे सुन्दर शब्द क्या है ?’ इस पर नेरुदा ने कहा ‘‘मैं इसका जवाब रेडियो के गाने की तरह काफी फूहड़ ढंग से एक ऐसे शब्द के जरिये देने जा रहा हूँ जो बहुत घिसा-पिटा शब्द है : वह शब्द है प्रेम। आप इसका जितना ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, यह उतना ही ज्यादा मजबूत होता जाता है। और इस शब्द का दुरुपयोग करने में भी कोई नुकसान नहीं होता है।’’

नेरुदा की ही एक पंक्ति है : ‘‘कितना संक्षिप्त है प्यार और भूलने का अरसा कितना लम्बा।’’
सिर्फ 23 वर्ष की उम्र में ही अपने संकलन ‘प्रेम की बीस कविताएँ और निशाद का एक गीत’ से विश्व प्रसिद्ध हो चुके प्रेम के कवि नेरुदा एक निष्ठावान कम्युनिस्ट थे। वे एक कवि और कम्युनिस्ट के अलावा एक राजदूत दुनिया भर में शरण के लिए भटकते राजनीतिक शरणार्थी चिले के पार्लियामेण्ट में सिनेटर और राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार भी थे। वे आम लोगों और सारी दुनिया के साहित्य प्रेमियों के प्रिय रहे, तो समान रूप से हमेशा विवादों में भी घिरे रहे। उनकी कविता की तरह ही उनका समूचा जीवन कम आकर्षक नहीं रहा है।

यह पुस्तक प्रेम की कम्युनिस्ट कवि के सम्मोहक जीवन के बिना किसी अतिरंजना के एक प्रामाणिक तस्वीर पेश करती है। इसे पाब्लो नेरुदा पर हिन्दी में अपने ढंग की एक अकेली किताब कहा जा सकता है।
सीधी-सी बात

शक्ति होती है मौन ( पेड़ कहते हैं मुझसे )
और गहराई भी ( कहती हैं जड़ें )
और पवित्रता भी ( कहता है अन्न )

पेड़ ने कभी नहीं कहा :
'मैं सबसे ऊँचा हूँ !'

जड़ ने कभी नहीं कहा :
'मैं बेहद गहराई से आयी हूँ !'

और रोटी कभी नहीं बोली :
'दुनिया में क्या है मुझसे अच्छा !'

Tuesday, October 11, 2011

चाँद कुछ कहता है

आज शरद पूर्णिमा का चाँद है ...गोल चमकता हुआ ..और कुछ दिन बाद यह चाँद करवाचौथ का चाँद होगा ............इन्तजार करवाता ..प्रेम के एहसास में डूबा हुआ .........आसमान पर निकला चाँद ,हर लिखने वाली की प्रेरणा है ,बचपन में वह बच्चो का मामा है ,और एक कल्पना जिस में बैठी बूढी नानी चरखा कात रही है और वही चाँद जवानी में एक प्रेमी /प्रेमिका कि हर बात को कहने का जरिया ...


चाँद कुछ कहता है
कहा था उसने
चाँदनी रात के साए में
तनिक रुको,
अभी मुड कर आता हूँ मैं ..
तब से
भोर के तारे को
मैंने उसके इन्तजार में
रोक कर रखा है ....

वह इन्तजार कभी खत्म होने पर नहीं आता ...और एक अजब सी उदासी का एहसास शिद्दत से दिल को यह कहने पर मजबूर कर देता है

सितारों के बीच में
तन्हा चाँद
और भी उदास कर जाता है
तब शिद्दत से होता है
एहसास ..
कि
विरह का यह रंग
सिर्फ़ मेरे लिए नही है ....


चाँद हर रोज़ अपने नए रंग रूप में आ कर लुभाता है और हर तरह से किसी भी दिल को कुछ न कुछ कहने पर मजबूर कर जाता है ..हर चाँद का रोमांस अलग है रोमांच अलग है ...

भीगा चाँद
टप टप टपकते मेह सा
सिला सा -अधजगा सा
तन्हाई में लिपटा
धीरे धीरे दस्तक देता रहा
नज़रो से बरसता रहा

अमावस का चाँद
तेरे मेरे मिलन के
बीच ढला
एक न ख़त्म
होने वाला अँधेरा


पूर्णिमा का चाँद
यूँ निकला
तमस के
अंधेरों को चीर कर
जैसे कोई
ख़त तेरे आने की
ख़बर दे जाए ....


और कभी यह लगता है गोल फ़ुटबाल सा ....

चाँद
यह गोल फुटबाल
को  किसने टांगा
अम्बर पर
कल तो यह
मैदान में
खेलते हुए देखा था


कभी यह एहसास देता है बाहों में बंदी होने का और फिर उस से दूर होने का

चाँद
बंदी था कल यही
शाखाओं की बाहों में
फरार हुए कैदी  सा
अब बादलों में छिपता है

कभी कभी दिल करता है कि अपनी बंद मुट्ठी में इस चाँद को बंद कर लूँ और दुनिया को भी बता दूँ
चाँद  की  फितरत


मुट्ठी
में भर
छिपा लूँ सारी चाँदनी
बैरी जग को बता दूँ
कि जिसे वो  

दाग़दार समझता है
वो ही चाँद  

उसकी जिंदगी में
शीतल छाँव भरता है..

कभी कभी चाँद जब आपकी खिड़की से झाँकने लगता है तो यूँ लगता है जैसे वह अपन पास बुला कर कुछ कह रहा हो ...तब अनायास ही यह पंक्तियाँ दिल से निकल जाती है

कल रात हुई
इक हौली सी  आहट
झांकी खिड़की से
चाँद की मुस्कराहट
अपनी फैली बाँहों से 
जैसे किया उसने
कुछ अनकहा सा इशारा
मैंने भी न जाने,
क्या सोच कर
बंद किया हर झरोखा
और कहा ,
रुक जाओ....
बहुत सर्द है यहाँ
 ठहरा सहमा है हुआ
हर जज्बात....
शायद तुम्हारे यहाँ होने से
कुछ पिघलने का एहसास
इस उदास दिल को हो जाए
और दे जाए
कुछ धड़कने जीने की
कुछ वजह तो
 अब जीने की बन जाए !!

पर चाँद कहाँ सुनता है वह आता है ,जाता है और अंत में दिल चाँद  की इस शरारत से चाँद को कह उठता है

कुछ दिन
नभ पर
हमें भी तो
चमकाने दो
जाओ चाँद
तुम छुट्टी पर....