Thursday, December 15, 2011

दावा ...

दावा ...

उँगलियों से लिपटे
उलझती ...
वक़्त की गिरह में
लिपटी कुछ यादें
और कुछ बातें
जो दावा करती है
तेरे बहुत करीब होने का
पर ...........
कभी पूछ नहीं पायी
तुमसे ......
वह छोटी छोटी बातें
जो अक्सर
बेफजूल हुआ करती है
कि ....तुम्हे क्या पसंद है ?
बरसात में भीगना ?
रोशनदान से छनती
आती रोशनी का
धीरे से गुदगुदाना
मुक्त गगन में
एक जुट कबूतरों के
झुण्ड का उड़ना
सर्दियों की सुबह की
गिरती ओस में भीगना
किस करवट सोना
और क्या भाता है तुम्हे
यूँ ही बेमतलब
मेरी तरह से ठहाके लगाना ?
सच कितनी छोटी छोटी बातें
कभी नहीं पूछ पाया
यह  मन ....
जो तुमसे जुड़े रहने का
हर वक़्त दावा करता है ..!!!

20 टिप्पणियाँ:

प्रवीण पाण्डेय said...

संवाद की स्थिति कई रूपों में व्यक्त होती है, बहुत ही अच्छे ढंग से बताया आपने।

Kanupriya said...

Well written! :)

Monika Jain "मिष्ठी" said...

Beautiful...welcome to my blog :)

संजय भास्कर said...

लाज़वाब प्रस्तुति..आभार

Arvind Mishra said...

वाह कितना मन को छूता हुआ

वन्दना said...

ज़िन्दगी मे बहुत कुछ अनकहा ही रह जाता है।

संतोष कुमार said...

बहुत सुंदर रचना !

आभार !!

sushma 'आहुति' said...

बेहतरीन अभिवयक्ति.....

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

deeeeeeeeeeeeeep down inside thought.....

दिगम्बर नासवा said...

Ye be fazool bate jeevan ko pal pal samete hoti hain ... Inhibit mein to jeevan simta hota hai .... Lajawab ...

सदा said...

सच कितनी छोटी छोटी बातें
कभी नहीं पूछ पाया
यह मन ....
जो तुमसे जुड़े रहने का
हर वक़्त दावा करता है ..!
बहुत खूब ।

Rajput said...

सच कितनी छोटी छोटी बातें
कभी नहीं पूछ पाया
यह मन ....
जो तुमसे जुड़े रहने का
हर वक़्त दावा करता है ..!!!

बहुत खुबसूरत और भावपूर्ण रचना |

निवेदिता said...

ये अनकही सी अभिव्यक्ति .... चश्मे-बद-दूर !

Kailash Sharma said...

बहुत ख़ूबसूरत अभिव्यक्ति...

Maheshwari kaneri said...

बहुत सुन्दर..

जीवन का उद्देश said...

यह दुनिया की जन्नत तो कुछ भी नही है. वास्तविक जन्नत को किसी ने देखा नही परन्तु अल्लाह ने अपने ग्रन्थों में कुछ बयान किया है, जिसे पुस्तकों तलाशा जा सकता है।
एक अच्छा बलोग है, बहुत बहुत धन्यवाद स्वीकार करें।

Naveen Mani Tripathi said...

vah ak dawa ak khoobsoorat prvishti lagi ..... badhai

रंजना said...

वाह...कितने सुन्दर ढंग से इस सच को रखा आपने..

सच है, हर कदम साथ रह, सब कुछ जान्ने का दावा कर भी कितना चूक जाते हैं हम अक्सर ही..

अरूण साथी said...

bahut sundar kawita...aabhar..

Ritesh Sinha said...

Bahut hi Sundar Rachna... Keep it up...!!!