हर प्रेम कहानी की तरह
मैं भी अपनी प्रेम कहानी का
एक सच हूँ ...!!
"हाँ "तुम नहीं समझ सकते
इसके अंत को
कि कैसा लगता है
प्रेम की गलियों में
भटकने का पागलपन
यूँ ही बैठे बैठे चौंक जाना
और घबरा के अनेक आरोपों को
दूसरे के चरित्र पर थोप देना
लगता है कई बार इस से
कि
कहानी यूँ ही बुन ली जाती है
पर ......
जब मन के
किसी कोने में
अँधेरे हो तब
"कैसे "कोई रोशनी का गीत गुनगुनाये
और मैं इसी "कैसे "को भ्रमा कर
तुम्हे प्रेम का गीत सुनाना चाहती हूँ
बस तुम यूँ ही देखते हुए मुझे .
उस गीत को सुनते रहना ..सुनते रहना!!!!!
मैं भी अपनी प्रेम कहानी का
एक सच हूँ ...!!
"हाँ "तुम नहीं समझ सकते
इसके अंत को
कि कैसा लगता है
प्रेम की गलियों में
भटकने का पागलपन
यूँ ही बैठे बैठे चौंक जाना
और घबरा के अनेक आरोपों को
दूसरे के चरित्र पर थोप देना
लगता है कई बार इस से
कि
कहानी यूँ ही बुन ली जाती है
पर ......
जब मन के
किसी कोने में
अँधेरे हो तब
"कैसे "कोई रोशनी का गीत गुनगुनाये
और मैं इसी "कैसे "को भ्रमा कर
तुम्हे प्रेम का गीत सुनाना चाहती हूँ
बस तुम यूँ ही देखते हुए मुझे .
उस गीत को सुनते रहना ..सुनते रहना!!!!!

31 टिप्पणियाँ:
मन में कितनी बात छिपाये रहते हैं प्रेमीजन, वे ही सबसे अच्छा जानते हैं। प्रेम की तुलना सागर से की जाती है।
तुम्हे प्रेम का गीत सुनाना चाहती हूँ
बस तुम यूँ ही देखते हुए मुझे
वाह ... बहुत खूब ।
प्रेम तो आखिर प्रेम है इसे कौन समझे .....बस महसूस कर पायें और जी पायें इसे तो ही बेहतर है ....!
मोहब्बत के सच किसने जाने हैं
मोहब्बत करने वाले तो बस दीवाने हैं
man ke shabdo se rachi khubsurat kavita..
prem ke sath sath dar ka bhi samavesh...ati sunder........aabhar
उद्दात प्रेम भरी रचना.
खूबसूरत, हम सुनते रहेगें
प्रेम को समझ पाना मुस्किल है......... भावपूर्ण रचना....
प्रेम समंदर दिल के अंदर..सुन्दर रचना.
Jo prem karat hai vahi jaanta hai is ka sach .. Bhavmay rachna ...
जब मन के
किसी कोने में
अँधेरे हो तब
"कैसे "कोई रोशनी का गीत गुनगुनाये
ek dam sach kaha...lekin is ke baad....
और मैं इसी "कैसे "को भ्रमा कर
तुम्हे प्रेम का गीत सुनाना चाहती हूँ
बस तुम यूँ ही देखते हुए मुझे .
उस गीत को सुनते रहना ..सुनते रहना!!!!!
aisa samarpan pyar me hi sambhav hai.
bahut prabhashali abhivyakti.
hello Mam
nice poems
thanks for sharing
प्रेम से भरपूर रचना ....
nice
cute and romantic
बहुत सुन्दर ..
Ranjana ji,
'Prem ' shabd seemit lagta par..
Arth aseemit rahe sada..
Sathi ko samjhate lagte..
Kavita padhkar hamen laga..
Kuchh bhi na samjhayen unko..
Ek din samajh wo jayenge..
Teri hi bhasha main tujhko..
Pyaar kya wo samjhayenge..
Sundar ahsaas bhari kavita..
Aage bhi aapki kavitaon ko padhte rahne ke liye abhi aapke blog se jud raha hun..
Shubhkamnaon sahit..
Deepak Shukla..
pyar bhari kavita ....
dear
i addiction of poems,I always trying to read such a poems which has natural beauty
i read your poem and hope u get all beautifull thoughts on the road of imaginations
rnjuu ji namaskaar, bahut khuub likhatii hai aap mere bhii blaag par aapakaa saadr aamntrn hai.
सुन्दर. लता का गाया "रसिक बलमा" याद आ गया.
प्रेम को समझ पाना मुस्किल है..एक भाव पूर्ण रचना
जब मन के
किसी कोने में
अँधेरे हो तब
"कैसे "कोई रोशनी का गीत गुनगुनाये
kora sach!!
bade dinon baad mauka mila to aaj aapke blog par ye behad bhawpoorn rachna padhne ko mili. man prasann ho gayaa
बहुत प्यारी सी कविता .....
जब मन के
किसी कोने में
अँधेरे हो तब
"कैसे "कोई रोशनी का गीत गुनगुनाये
और मैं इसी "कैसे "को भ्रमा कर
तुम्हे प्रेम का गीत सुनाना चाहती हूँ....
प्रेम भरी रचना.
कि कैसा लगता है
प्रेम की गलियों में
भटकने का पागलपन
यूँ ही बैठे बैठे चौंक जाना
और घबरा के अनेक आरोपों को
दूसरे के चरित्र पर थोप देना
....लाज़वाब अहसास...बहुत प्रेममयी अभिव्यक्ति..
वाह!! क्या बात है!!
भावपूर्ण ढंग से मनोभावों को शब्दों में बाँधा आपने...
बहुत बहुत सुन्दर, मर्मस्पर्शी...
"bhramaa kar" ke liye koi aur vikalp dekhiye.
प्रेम को समझने वाला प्रेमी ही हो सकता है दुनिया दार इसे क्या समझे । सुंदर भाव भरी रचना ।
आदरणीया
"कैसे "कोई रोशनी का गीत गुनगुनाये
और मैं इसी "कैसे "को भ्रमा कर
तुम्हे प्रेम का गीत सुनाना चाहती हूँ
बस तुम यूँ ही देखते हुए मुझे .
उस गीत को सुनते रहना ..सुनते रहना !!!!!
दिल को छू जाने वाली कविता
बहुत सुन्दर
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