Sunday, September 25, 2011

ज़िन्दगी का रुख

झूठे किस्से
हर वक़्त बहाने
अपने अहम् को
दिखाने में
और हर पल
मुझे छोटा दिखाने में
तुम कितनी
मशक्कत करते हो
काश यही कोशिश
तुमने खुद को निखारने
में की होती
तो आज ज़िन्दगी का रुख
कुछ खुशनुमा होता !!!

29 टिप्पणियाँ:

Anil Avtaar said...

Waah kya baat, kitne kam shabdon mein kahi hai aapne.. Aabhar...

प्रवीण पाण्डेय said...

इस कृत्रिमता में न जाने कितने जीवन बरबाद हो जाते हैं।

Maheshwari kaneri said...

गहन अनुभूति...

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

सटीक ...भावों को खूबसूरती से लिखा है ..

वन्दना said...

कितनी गहरी बात कह दी।

परमजीत सिँह बाली said...

बहुत बढ़िया!!

shikha varshney said...

अरे क्या बात कह दी ! एकदम पॉइंट पर.

डॉ. मनोज मिश्र said...

वाह,बहुत सुंदर.

sushma 'आहुति' said...

भावपूर्ण रचना....

anu (anju choudhary) said...

waha bahut khub...jindagi ka sabse bada sach...

डॉ0 ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ (Dr. Zakir Ali 'Rajnish') said...

सार्थक बात, पर ये बातें तो बाद में ही समझ में आती हैं न।

------
आप चलेंगे इस महाकुंभ में...?
...खींच लो जुबान उसकी।

abhishek kamal said...

lajwab hai. ekdam sahi likha hai apne.

सदा said...

वाह ...बहुत खूब कहा है आपने ।

मनीष said...

Khubsurat kriti...

अनामिका की सदायें ...... said...

kash aankhe khul jayen.

sunder abhivyakti.

chirag said...

bahut khoob
ultimate kya kavita likhi hain
maja aa gaya

Kishore Kumar Jain said...

बहुत कम शब्दों मे बहुत बङी बात कह दी। बधाई।
किशोग कुमार जैन

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार said...




हमेशा की तरह बहुत भावप्रवण आपकी रचना के लिए आभार !
प्रणाम है आपको और आपकी लेखनी को … … …


आपको सपरिवार
नवरात्रि पर्व की बधाई और शुभकामनाएं-मंगलकामनाएं !

-राजेन्द्र स्वर्णकार

Arvind Mishra said...

क्या यह सीख काम आयेगी ?

दिगम्बर नासवा said...

सच कहा है ... इंसान दूसरों की गलतियों के बजाये अपने आप को ठीक करे तो जीवन संवर जाता है ... लाजवाब ...

रंजना said...

बहुत सही कहा...

उर्जा नकारात्मक दिशा में जाया कर क्या पाया जा सकता है....

anita agarwal said...

pehli baar apke blog mei ayi hoon.... ekdum sachhi baat keh di aapne.... aksar log doosre ko neecha dikhanae mei apni sari shakti or apna uthaan kerne me lagate to janae kahan ke kahan pahuch jate....
mei to aap tak a gayi.... or aap?

Udan Tashtari said...

वाह!! कितनी खरी बात कह दी कविता के माध्यम से.

Udan Tashtari said...

वाह!! कितनी खरी बात कह दी कविता के माध्यम से.

Udan Tashtari said...

गहरी बात....उम्दा रचना.

S.N SHUKLA said...

सुन्दर और सार्थक रचना के लिए बहुत- बहुत बधाई .

कृपया मेरे ब्लॉग पर भी पधारने का कष्ट करें.

आशा जोगळेकर said...

सही कहा रंजू जी आधी जिंदगी इसी में बीत जाती है कि बोले हुए झूट को सच साबित कैसे करें ।

फणि राज मणि चन्दन said...

bahut khoob. Zindagi apne aap ko behtar karne me hi hai, dosharopan se kuchh nahi miltaa, miltaa hai to bas khaali kamzor rishte

मलकीत सिंह जीत said...

आदरनीय रंजना [रंजू भाटिया] जी ,आपकी सभी रचनाये बेहद अच्छी व् किसी न किसी विषय को उठाती है सौभाग्य से पढने को मिल गयी ,आपने निवेदन है की एक मार्ग दर्शक के रूप में (एक प्रायस "बेटियां बचाने का ")ब्लॉग में जुड़ने का कष्ट करें http://ekprayasbetiyanbachaneka.blogspot.com/