झूठे किस्से
हर वक़्त बहाने
अपने अहम् को
दिखाने में
और हर पल
मुझे छोटा दिखाने में
तुम कितनी
मशक्कत करते हो
काश यही कोशिश
तुमने खुद को निखारने
में की होती
तो आज ज़िन्दगी का रुख
कुछ खुशनुमा होता !!!
हर वक़्त बहाने
अपने अहम् को
दिखाने में
और हर पल
मुझे छोटा दिखाने में
तुम कितनी
मशक्कत करते हो
काश यही कोशिश
तुमने खुद को निखारने
में की होती
तो आज ज़िन्दगी का रुख
कुछ खुशनुमा होता !!!
29 टिप्पणियाँ:
Waah kya baat, kitne kam shabdon mein kahi hai aapne.. Aabhar...
इस कृत्रिमता में न जाने कितने जीवन बरबाद हो जाते हैं।
गहन अनुभूति...
सटीक ...भावों को खूबसूरती से लिखा है ..
कितनी गहरी बात कह दी।
बहुत बढ़िया!!
अरे क्या बात कह दी ! एकदम पॉइंट पर.
वाह,बहुत सुंदर.
भावपूर्ण रचना....
waha bahut khub...jindagi ka sabse bada sach...
सार्थक बात, पर ये बातें तो बाद में ही समझ में आती हैं न।
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आप चलेंगे इस महाकुंभ में...?
...खींच लो जुबान उसकी।
lajwab hai. ekdam sahi likha hai apne.
वाह ...बहुत खूब कहा है आपने ।
Khubsurat kriti...
kash aankhe khul jayen.
sunder abhivyakti.
bahut khoob
ultimate kya kavita likhi hain
maja aa gaya
बहुत कम शब्दों मे बहुत बङी बात कह दी। बधाई।
किशोग कुमार जैन
♥
हमेशा की तरह बहुत भावप्रवण आपकी रचना के लिए आभार !
प्रणाम है आपको और आपकी लेखनी को … … …
आपको सपरिवार
नवरात्रि पर्व की बधाई और शुभकामनाएं-मंगलकामनाएं !
-राजेन्द्र स्वर्णकार
क्या यह सीख काम आयेगी ?
सच कहा है ... इंसान दूसरों की गलतियों के बजाये अपने आप को ठीक करे तो जीवन संवर जाता है ... लाजवाब ...
बहुत सही कहा...
उर्जा नकारात्मक दिशा में जाया कर क्या पाया जा सकता है....
pehli baar apke blog mei ayi hoon.... ekdum sachhi baat keh di aapne.... aksar log doosre ko neecha dikhanae mei apni sari shakti or apna uthaan kerne me lagate to janae kahan ke kahan pahuch jate....
mei to aap tak a gayi.... or aap?
वाह!! कितनी खरी बात कह दी कविता के माध्यम से.
वाह!! कितनी खरी बात कह दी कविता के माध्यम से.
गहरी बात....उम्दा रचना.
सुन्दर और सार्थक रचना के लिए बहुत- बहुत बधाई .
कृपया मेरे ब्लॉग पर भी पधारने का कष्ट करें.
सही कहा रंजू जी आधी जिंदगी इसी में बीत जाती है कि बोले हुए झूट को सच साबित कैसे करें ।
bahut khoob. Zindagi apne aap ko behtar karne me hi hai, dosharopan se kuchh nahi miltaa, miltaa hai to bas khaali kamzor rishte
आदरनीय रंजना [रंजू भाटिया] जी ,आपकी सभी रचनाये बेहद अच्छी व् किसी न किसी विषय को उठाती है सौभाग्य से पढने को मिल गयी ,आपने निवेदन है की एक मार्ग दर्शक के रूप में (एक प्रायस "बेटियां बचाने का ")ब्लॉग में जुड़ने का कष्ट करें http://ekprayasbetiyanbachaneka.blogspot.com/
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