Thursday, May 05, 2011

इन्तजार

होले से धीरे से सरकती
शाम की  यह बेला
कुछ ऐसे ही
 राह तकती है

जैसे मन के भीतर
कहीं  गहरे एहसास
 पथराये से रहते हैं
और तलाश करते हैं
किसी राम की
पर ...
न सांझ का
इन्तजार खत्म होता है
और न ही पथराये
एहसासों में
जगाता है कोई सम्पदन......

32 टिप्पणियाँ:

वन्दना said...

इंतज़ार को मुकम्मल जहां कब मिलता है……………।

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " said...

कभी-कभी तो जिंदगी - इंतज़ार में ही बीतती लगती है

सुन्दर रचना

संतोष कुमार said...

वाह बहुत खूब !

Praveen Kumar said...

बहुत ही अच्छी रचना है आप का बहुत धन्यवाद

MM Enterprises said...

Wow so nice & good poem thanks for sharing.

shikha varshney said...

इंतज़ार तो इतंजार ही रह जाता है
सुन्दर अभिव्यक्ति.

pallavi trivedi said...

इंतज़ार पर अच्छा लिखा आपने...

सदा said...

जैसे मन के भीतर
कहीं गहरे एहसास
पथराये से रहते हैं
और तलाश करते हैं
किसी राम की

वाह ... ये शब्‍द नि:शब्‍द करते हुये ...अनुपम प्रस्‍तुति ।

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

बहुत सुंदर ढंग से शब्दों में उतारी इंतजार की वेदना.......

Kailash C Sharma said...

इंतज़ार ज़िंदगी में कहाँ खत्म होता है..बहुत सुन्दर भावपूर्ण अभिव्यक्ति.

अल्पना वर्मा said...

'गहरे अहसास का पथरा जाना और किसी राम का इंतज़ार करना''..वाह!

छोटी कविता मगर भावों में गहनता है .

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

ओह ..दर्द भरी अभिव्यक्ति ...



सम्पदन..-- स्पंदन

Udan Tashtari said...

बहुत गहरी बात कहती रचना.

Udan Tashtari said...

बहुत गहरी बात कहती रचना.

Udan Tashtari said...

बहुत सुन्दर रचना.

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

सम्पदन का मतलब क्या होता है, बस यही समझ नहीं आया वैसे कविता बहुत खूबसूरत है!

निर्मला कपिला said...

इन्तजार मे दिल की कशमक्श ---। अच्छी रचना। शुभकामनायें।

दर्शन कौर धनोए said...

intjaar naam ko sarthk karti hui aek subsurt kvita

singhsdm said...

रंजना जी
कविता का कथ्य कविता से पाठक को जोड़ लेता है और शायद यही इस कविता की सफलता का प्रतीक है.
जैसे मन के भीतर
कहीं गहरे एहसास
पथराये से रहते हैं
और तलाश करते हैं
किसी राम की

Patali-The-Village said...

बहुत ही अच्छी रचना है आप का बहुत धन्यवाद|

RAJPUROHITMANURAJ said...

बहुत ही अच्छी रचना है कभी मेरे ब्लॉग पर भी पधारियेगा आपका स्वागत है !

RAJPUROHITMANURAJ said...

बहुत ही अच्छी रचना है कभी मेरे ब्लॉग पर भी पधारियेगा आपका स्वागत है !

RAJPUROHITMANURAJ said...

बहुत ही अच्छी रचना है

रंजना said...

भावपूर्ण अभिव्यक्ति....

RAJPUROHITMANURAJ said...

बहुत ही अच्छी रचना है

Mrs. Asha Joglekar said...

जैसे मन के भीतर
कहीं गहरे एहसास
पथराये से रहते हैं
और तलाश करते हैं
किसी राम की

वाह सुनीता जी बहुत सुंदर ।

Manav Mehta said...

waah aisa injaar kabhi na khatm hone vala....

दिगम्बर नासवा said...

राम नही आए और अहिल्या इंतेज़ार करती रही ... पत्थर की मूर्ति की तरह ... बहुत गहरे बिंब बन कर उभरते हैं इस रचना से ...
आशा है आपका स्वस्थ ठीक होगा ... आज कर ब्लॉग पर कम नज़र आती हैं आप ...

Maheshwari kaneri said...

इंतजार के एहसास की सुन्दर अभिव्यक्ति है

अजय कुमार said...

खूबसूरत अभिव्यक्ति

Maheshwari kaneri said...

इंतजार का एहसास बहुत सुन्दर भावों की सुन्दर अभिव्यक्ति है।

neelima garg said...

न ही पथराये
एहसासों में
जगाता है कोई सम्पदन......ati bhavpuran...