Wednesday, December 08, 2010

एक ख्वाइश

एक ख्वाइश
कि समेट लूँ
अपने
अँधेरे के
सब हिस्से
और गठरी में
बांध छोड आऊं
क्षितिज  के पार
और ले आऊं
वहां से
एक लौ
रोशनी की
और तब तक रखूं उसको
मुस्कराहट की ओट में
जब तक वह
खिलखिलाती
हँसी में
तब्दील न हो जाए

7.12 .10 

28 टिप्पणियाँ:

Sonal Rastogi said...

अरे वो तो आपके होंठो के करीब कहीं दबी है आज़ाद कीजिये न .... nice

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत प्यारी सोच ....मन के करीब लगी यह रचना ..

वन्दना said...

ख्वाहिश हो तो ऐसी……………बहुत सु्न्दर्।

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

बेहतरीन अभिव्यक्ति ..... सार्थक और आशावादी सोच

sada said...

खिलखिलाती हंसी में तब्‍दील न हो जाए ....बहुत ही सुन्‍दर कोमल भावनाओं का संगम ..लाजवाब ।

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

khoobsurat abhivyakti

वन्दना said...

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
कल (9/12/2010) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा।
http://charchamanch.blogspot.com

महेन्द्र मिश्र said...

बढ़िया ख्वाहिश ... भावपूर्ण अभिव्यक्ति...आभार

अभिषेक ओझा said...

बड़ी नेक ख्वाहिस है जी.

Kunwar Kusumesh said...

सुन्दर अभिव्यक्ति

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर ख्वाहिश जी...
आप रोहतक नही आई २६ नवम्बर को , जब कि सभी इंतजार कर रहे थे.
धन्यवाद

अल्पना वर्मा said...

ख्वाहिश पूरी हो...और खुशियाँ हमेशा यूँ ही खिलखिलाती रहें.
.....सुन्दर भावाभिव्यक्ति .

यशवन्त said...

बेहतरीन!

दिगम्बर नासवा said...

बहुत ही मीठा एहसास ... रोशनी की लो ऐसे ही जलती रहे खिलखिलती रहे ... खुशियाँ यूँ ही खिलखिलाती रहें ...

Anjana (Gudia) said...

sunder... kash aapki kaamna puri ho!

दीप्ति शर्मा said...

bahut sunder
kabhi yaha bhi aaye
www.deepti09sharma.blogspot.com

Kailash C Sharma said...

बहुत ही मीठी ख्वाहिश..बहुत ही सुन्दर अहसास..बधाई

सुमन'मीत' said...

बहुत सुन्दर........ रंजना जी

अनामिका की सदायें ...... said...

ऐसा हो सके तो कितना अच्छा हो...लेकिन होना उतना ही मुशकिल.

सुंदर रचना.

सत्यम शिवम said...

बहुत ही बेहतरीन रचना...मेरा ब्लागःः"काव्य कल्पना" at http://satyamshivam95.blogspot.com/ आप आये और मेरा मार्गदर्शन करे....धन्यवाद।

Rahul Singh said...

जल्‍द पूरी हो आपकी ख्‍वाहिश, शुभकामनाएं और पूरी हो चुकी हो तो बधाइयां

amar jeet said...

अच्छी रचना लफ्जो का सुंदर उपयोग !
मेरे ब्लॉग में SMS की दुनिया .........

शरद कोकास said...

बहुत अच्छी ख्वाइश है यह आमीन ।

रंजना said...

वाह..क्या सुन्दर खाया हैं...कोमल गुनगुनाती मन को छूती बहुत ही सुन्दर रचना..

"वहां से
एक लो
रोशनी की "

यहाँ कृपया सुधार लें..

लो नहीं "लौ"

सतीश सक्सेना said...

बहुत खूब रंजना जी ! शुभकामनायें आपको !

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

बहुत प्‍यारी है यह ख्‍वाहिश।

---------
छुई-मुई सी नाज़ुक...
कुँवर बच्‍चों के बचपन को बचालो।

ज्ञानचंद मर्मज्ञ said...

वाह,रंजू जी,
रोशनी को मुस्कराहट की ओट में रख कर खिलखिलाहट में बदलने वाला प्रयोग एकदम नया है !
मेरी शुभकामनाएं !
-ज्ञानचंद मर्मज्ञ

ashu said...

ek behtarennabhvyakti,ashawan ,aur prempurn hredaya...jo manav aur manav ke astitwa ki aur sabka dhayan aakarshit karta hai..!! ek behtareen ...rachana