जब करनी होती ख़ुद से बाते तो में कुछ लफ्ज़ यूँ दिल के कह लेती हूँ ....
ज़रा थम थम के रफ़्ता रफ़्ता चल ज़िंदगी कि यह समा या फ़िज़ा बदल ना जाए
अभी तो आई है मेरे दर पर ख़ुशी कही यह तेरी तेज़ रफ़्तार से डर ना जाए!! - रंजू
Friday, November 26, 2010
गुरुत्वाकर्षण
अपने हर झूठ
और अपने अहम् को
कब तक उछालोगे
गेंद की तरह
सपनों के आसमान में
आखिर एक दिन तो आ कर
जमीन पर ही गिरोगे
क्यों कि
जीवन का सत्य यही है ...................
बहुत अच्छी बात कही आपने चंद लाइनों में अपने अहम् ,अपने झूठ से हम अक्सर ये सोचते है की हमने लोगो की आँख में धुल झोंक दिया है! परन्तु ये झूठ अहम् की दीवार ज्यादा दिनों तक नहीं रहती अक्सर ढह जाती है!
25 टिप्पणियाँ:
"एक दिन तो आ कर
जमीन पर ही गिरोगे
क्यों कि
जीवन का सत्य यही है" सुन्दर क्षणिका.
सुन्दर अभिव्यक्ति...
बहुत ज़बरदस्त गुरुत्त्वाकर्षण ....
जी हाँ यही जीवन का सत्य है
सुन्दर भाव
अरे कुछ दिन तो उछाल लेने दीजिये :)
बढ़िया.
रंजू जी चन्द शब्दों मे जीवन का सत्य बता दिया बहुत खूब । बधाई।
यह अहम् कि पतंग कितनी भी ऊँची जाए, आखिर तो इसे नीचे ही आना है ...
सुन्दर....
मनोज
बिलकुल जी यही सत्य है.
प्रभावशाली रचना.
"एक दिन तो आ कर
जमीन पर ही गिरोगे
क्यों कि
जीवन का सत्य यही है"
उम्दा रचना ...!!
रंजना जी,
विज्ञान और साहित्य का इससे अच्छा तालमेल मैंने नहीं देखा.सुन्दर कविता के लिए बधाई. .
लेकिन क्या सच ऊपर ही जाता है बहुत पहले कहीं पढ़ा था। truth is a lie repeated hundred times.
लेकिन क्या सच ऊपर ही जाता है बहुत पहले कहीं पढ़ा था। truth is a lie repeated hundred times.
"एक दिन तो आ कर
जमीन पर ही गिरोगे
क्यों कि
जीवन का सत्य यही है"
प्रभावी ..... चंद शब्दों में समेटा जीवन का सार......
lagta hai Newton ne aapki rachna padhi thi...........:D
sach hi to kaha aapne...
.
वक़्त , उम्र और अनुभवों के साथ व्यक्ति ,जीवन का ये फलसफा समझ ही लेता है शायद।
.
अपने हर झूठ
और अपने अहम् को
कब तक उछालोगे
गेंद की तरह
सपनों के आसमान में
आखिर एक दिन तो आ कर
जमीन पर ही गिरोगे
क्यों कि
जीवन का सत्य यही है........
काफी सुन्दर और ऊँची बात कह डाली, रंजना जी !
बहुत अच्छी बात कही आपने चंद लाइनों में
अपने अहम् ,अपने झूठ से हम अक्सर ये सोचते है की हमने लोगो की आँख में धुल झोंक दिया है! परन्तु ये झूठ अहम् की दीवार ज्यादा दिनों तक नहीं रहती अक्सर ढह जाती है!
बेहद प्रभावशाली रचना।
बेहद भावपूर्ण अभिव्यक्ति.........
http://saaransh-ek-ant.blogspot.com
vigyan ke madhyam se achha samjhaya jeeva ko aapne
Wah Ranjooji yatharh ko kitane sunder aur thodese shabdon me piro diya aapne.
सही ...एकदम सही !!!!
बहुत खूब ... जीवन का असल सत्य तो यही है ...
बहुत गहरी बात है इस रचना में ..
bhut sundar abhivyakti...
Shayad zamin se judaav tabhi zaroori hai .
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