Friday, November 26, 2010

गुरुत्वाकर्षण

अपने हर झूठ
और अपने अहम् को
कब तक उछालोगे
गेंद की तरह
सपनों के आसमान में
आखिर एक दिन तो आ कर
जमीन पर ही  गिरोगे
क्यों कि
जीवन का सत्य यही है ...................

रंजू
26/11/10 

25 टिप्पणियाँ:

PN Subramanian said...

"एक दिन तो आ कर
जमीन पर ही गिरोगे
क्यों कि
जीवन का सत्य यही है" सुन्दर क्षणिका.

फ़िरदौस ख़ान said...

सुन्दर अभिव्यक्ति...

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत ज़बरदस्त गुरुत्त्वाकर्षण ....

M VERMA said...

जी हाँ यही जीवन का सत्य है
सुन्दर भाव

अभिषेक ओझा said...

अरे कुछ दिन तो उछाल लेने दीजिये :)
बढ़िया.

निर्मला कपिला said...

रंजू जी चन्द शब्दों मे जीवन का सत्य बता दिया बहुत खूब । बधाई।

Manoj K said...

यह अहम् कि पतंग कितनी भी ऊँची जाए, आखिर तो इसे नीचे ही आना है ...

सुन्दर....

मनोज

अनामिका की सदायें ...... said...

बिलकुल जी यही सत्य है.

प्रभावशाली रचना.

sanu shukla said...

"एक दिन तो आ कर
जमीन पर ही गिरोगे
क्यों कि
जीवन का सत्य यही है"

उम्दा रचना ...!!

Kunwar Kusumesh said...

रंजना जी,
विज्ञान और साहित्य का इससे अच्छा तालमेल मैंने नहीं देखा.सुन्दर कविता के लिए बधाई. .

उन्मुक्त said...

लेकिन क्या सच ऊपर ही जाता है बहुत पहले कहीं पढ़ा था। truth is a lie repeated hundred times.

उन्मुक्त said...

लेकिन क्या सच ऊपर ही जाता है बहुत पहले कहीं पढ़ा था। truth is a lie repeated hundred times.

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

"एक दिन तो आ कर
जमीन पर ही गिरोगे
क्यों कि
जीवन का सत्य यही है"
प्रभावी ..... चंद शब्दों में समेटा जीवन का सार......

Mukesh Kumar Sinha said...

lagta hai Newton ne aapki rachna padhi thi...........:D
sach hi to kaha aapne...

ZEAL said...

.

वक़्त , उम्र और अनुभवों के साथ व्यक्ति ,जीवन का ये फलसफा समझ ही लेता है शायद।

.

पी.सी.गोदियाल said...

अपने हर झूठ
और अपने अहम् को
कब तक उछालोगे
गेंद की तरह
सपनों के आसमान में
आखिर एक दिन तो आ कर
जमीन पर ही गिरोगे
क्यों कि
जीवन का सत्य यही है........

काफी सुन्दर और ऊँची बात कह डाली, रंजना जी !

amar jeet said...

बहुत अच्छी बात कही आपने चंद लाइनों में
अपने अहम् ,अपने झूठ से हम अक्सर ये सोचते है की हमने लोगो की आँख में धुल झोंक दिया है! परन्तु ये झूठ अहम् की दीवार ज्यादा दिनों तक नहीं रहती अक्सर ढह जाती है!

वन्दना said...

बेहद प्रभावशाली रचना।

Manav Mehta said...

बेहद भावपूर्ण अभिव्यक्ति.........

http://saaransh-ek-ant.blogspot.com

Sunil Kumar said...

vigyan ke madhyam se achha samjhaya jeeva ko aapne

Mrs. Asha Joglekar said...

Wah Ranjooji yatharh ko kitane sunder aur thodese shabdon me piro diya aapne.

रंजना said...

सही ...एकदम सही !!!!

दिगम्बर नासवा said...

बहुत खूब ... जीवन का असल सत्य तो यही है ...
बहुत गहरी बात है इस रचना में ..

Manav Mehta said...

bhut sundar abhivyakti...

aarkay said...

Shayad zamin se judaav tabhi zaroori hai .