Wednesday, November 17, 2010

परछाई

रात के घने अंधेरे
कैसे सब फ़र्क
 मिटा जाते हैं
अलग अलग  वजूद
 अलग राह के
मुसाफिर  की परछाई को
एक कर जाते हैं
रोशन होते ही
हर उजाले में
यह छिटक  कर
अलग हो जाते हैं  
:
:
शायद ज़िन्दगी का सच यही है ?????????

19 टिप्पणियाँ:

Manoj K said...

रोशन होते ही हर उजाले में यह छिटक कर अलग हो जाते हैं : : शायद ज़िन्दगी का सच यही है ..


शायद .. अच्छी छोटी सी प्यारी सी रचना..

मनोज खत्री
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यूनिवर्सिटी का टीचर'स हॉस्टल

वन्दना said...

बिल्कुल यही सत्य है …………परछाइयाँ कब तक साथ देती हैं।

मनोज कुमार said...

सच है यह। और ज़िन्दगी का सच भी!! बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!
विचार-श्री गुरुवे नमः

कविता रावत said...

Chhoti magar parchayee ka sundar bimb chitran...

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

खूबसूरती से ज़िंदगी के सच को बयाँ किया है

श्रद्धा जैन said...

bahut sach kaha hai, bahut kam shabdon mein bahut achcha chitran

Kajal Kumar said...

आपकी रचनाएं और सुंदर होती जा रही हैं. आभार.

निर्मला कपिला said...

रंजू जी बिलकुल सही कहा ज़िन्दगी का यही सच है। शुभकामनायें।

shikha varshney said...

कम शब्दों में सार्थक बात कह दी आपने.

PN Subramanian said...

अच्छी रचना. अँधेरे और उजाले का यह अंतर.

ZEAL said...

सार्थक बात !!

रंजना said...

इसलिए तो स्याह/काले रंग को ही मुख्या रंग मन गया है,जिसमे मिल कोई भी रंग अपना अस्तित्व नहीं रख पाता..

सुमन'मीत' said...

बहुत सुन्दर......गहरी अभिव्यक्ति..........

दिगम्बर नासवा said...

Bhut khoob ... jeevan ke sach ko bahut asaani le shabd de diye ... lajawaab ...

अनामिका की सदायें ...... said...

शायद रात की स्याही फर्क देख नहीं पाती...इसलिए ऐसा होता है.

प्रभावशाली क्षणिका.

अल्पना वर्मा said...

चंद पंक्तिओं में बखूबी बखान किया है एक सच!
बुरे वक्त में /दुःख में में हम खुद के सबसे करीब होते हैं.

प्रतिभा सक्सेना said...

छोटी-सी धारदार रचना अच्छी लगी,रंजू जी .

Vijay Kumar Sappatti said...

zindagi ka asli sach to yahi hai ji
padhkar bahut aacha laga


bahut sundar rachna

badhayi

vijay
kavitao ke man se ...
pls visit my blog - poemsofvijay.blogspot.com

aarkay said...

raat ke andheron mein bahut kuchh dhak jata hai . shayad isi liyer kaha hai "ujalon se behtar hain shab ke andhere."