अन्तर
दिन भर अपनी चमक से
कोने कोने
को गर्माता
यह सूरज अब
धीरे धीरे
अपनी गुफा
की तरफ़ जायेगा
हौले से निकलता चाँद
अपनी फलक से
इस ढलती शाम
पर गहरा जायेगा
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अलग राहें
अलग निगाहें
टुकडो में बंटी ज़िन्दगी
धीरे धीरे
अब प्यार के लम्हों
का अन्तर
समझ में आ रहा है
25 टिप्पणियाँ:
धीरे धीरे
अब प्यार के लम्हों
का अन्तर
समझ में आ रहा है
अतिसुन्दर भावाव्यक्ति , बधाई के पात्र है
चंद लफ़्ज़ों मे गहन अभिव्यक्ति।
सुंदर अभिव्यक्ति !!
वाह...बहुत खूब, सुंदर कविता।
सुंदर अभिव्यक्ति.
कविता सृजन जीवन की वेदना के साथ जीते जीने का एक आर्ट भी है ..हैं न रंजू जी !
टुकडो में बंटी ज़िन्दगी
khoobsurat
सुंदर अभिव्यक्ति....
कम शब्दों में बहुत गहरी बात कह दी.
वाह क्या बात है...........
हौले से निकलता चाँद
अपनी फलक से
इस ढलती शाम
पर गहरा जायेगा
चंद शब्दों में प्यारी सी मगर अर्थपूर्ण रचना है...
अलग राहें
अलग निगाहें
टुकडो में बंटी ज़िन्दगी
धीरे धीरे
अब प्यार के लम्हों
का अन्तर
समझ में आ रहा है
शानदार अभिव्यक्ति है रंजना जी, हमेशा की तरह.
लम्हा दर लम्हा हर बात बदल जाती है ....
अच्छी अभिव्यक्ति
'टुकडो में बंटी ज़िन्दगी'
और
'प्यार के लम्हों
का अन्तर'
वाह!
बहुत ही कुशलता से भाव अभिव्यक्त किये हैं इन थोड़े से ही शब्दों में ..बहुत खूब !
धीरे धीरे
अब प्यार के लम्हों
का अन्तर
समझ में आ रहा है
धूप छाँ के ये टुकडे दिल मे सहेजे रखते है। बहुत काम आते हैं तन्हाई मे। सुन्दर रचना।
बहुत कोमल भावाभिव्यक्ति।
behad sunder.
अनुभूति की तीव्रता को बहुत सरल ढंग से आपने शब्दों में बांध दिया है। बहुत सुंदर शब्द चित्र।
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मिलिए तंत्र मंत्र वाले गुरूजी से।
भेदभाव करते हैं वे ही जिनकी पूजा कम है।
वाकई ! सहमत हूँ आपसे ! शुभकामनायें !
सुंदर रचना
मासूम सी कवितायें
दोनों ही रचनाएं भावों की गहराई से परिपूर्ण हैं
हैपी ब्लॉगिंग
अलग राहें
अलग निगाहें
टुकडो में बंटी ज़िन्दगी
धीरे धीरे
अब प्यार के लम्हों
का अन्तर
समझ में आ रहा है ...
इन प्यार के लम्हों में उदासी का तड़का नज़र आ रहा है ...
ये मजबूरी के लम्हे भी कभी कभी प्यार बन जाते हैं ... अच्छा लिखा है गहरा लिखा है ..
गहन अभिव्यक्ति...
वाह सुंदर प्यार के लम्हे और खूबसूरत भाव ।
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