Wednesday, November 10, 2010

अन्तर


दिन भर अपनी चमक से
कोने कोने
को गर्माता
यह सूरज अब
धीरे धीरे
अपनी गुफा
की तरफ़ जायेगा
हौले से निकलता चाँद
अपनी फलक से
इस ढलती शाम
पर गहरा जायेगा

*******************
अलग राहें
अलग निगाहें
टुकडो में बंटी ज़िन्दगी
धीरे धीरे
अब प्यार के लम्हों
का अन्तर
समझ में आ रहा है

25 टिप्पणियाँ:

Sunil Kumar said...

धीरे धीरे
अब प्यार के लम्हों
का अन्तर
समझ में आ रहा है
अतिसुन्दर भावाव्यक्ति , बधाई के पात्र है

वन्दना said...

चंद लफ़्ज़ों मे गहन अभिव्यक्ति।

संगीता पुरी said...

सुंदर अभिव्‍यक्ति !!

mahendra verma said...

वाह...बहुत खूब, सुंदर कविता।

P.N. Subramanian said...

सुंदर अभिव्‍यक्ति.

Arvind Mishra said...

कविता सृजन जीवन की वेदना के साथ जीते जीने का एक आर्ट भी है ..हैं न रंजू जी !

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

टुकडो में बंटी ज़िन्दगी

khoobsurat

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

सुंदर अभिव्‍यक्ति....

अनामिका की सदायें ...... said...

कम शब्दों में बहुत गहरी बात कह दी.

सुमन'मीत' said...

वाह क्या बात है...........

rashmi ravija said...

हौले से निकलता चाँद
अपनी फलक से
इस ढलती शाम
पर गहरा जायेगा
चंद शब्दों में प्यारी सी मगर अर्थपूर्ण रचना है...

वन्दना अवस्थी दुबे said...

अलग राहें
अलग निगाहें
टुकडो में बंटी ज़िन्दगी
धीरे धीरे
अब प्यार के लम्हों
का अन्तर
समझ में आ रहा है
शानदार अभिव्यक्ति है रंजना जी, हमेशा की तरह.

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

लम्हा दर लम्हा हर बात बदल जाती है ....

अच्छी अभिव्यक्ति

अल्पना वर्मा said...

'टुकडो में बंटी ज़िन्दगी'
और
'प्यार के लम्हों
का अन्तर'
वाह!
बहुत ही कुशलता से भाव अभिव्यक्त किये हैं इन थोड़े से ही शब्दों में ..बहुत खूब !

निर्मला कपिला said...

धीरे धीरे
अब प्यार के लम्हों
का अन्तर
समझ में आ रहा है
धूप छाँ के ये टुकडे दिल मे सहेजे रखते है। बहुत काम आते हैं तन्हाई मे। सुन्दर रचना।

मनोज कुमार said...

बहुत कोमल भावाभिव्यक्ति।

mridula pradhan said...

behad sunder.

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

अनुभूति की तीव्रता को बहुत सरल ढंग से आपने शब्‍दों में बांध दिया है। बहुत सुंदर शब्‍द चित्र।

---------
मिलिए तंत्र मंत्र वाले गुरूजी से।
भेदभाव करते हैं वे ही जिनकी पूजा कम है।

सतीश सक्सेना said...

वाकई ! सहमत हूँ आपसे ! शुभकामनायें !

amar jeet said...

सुंदर रचना

शरद कोकास said...

मासूम सी कवितायें

आशीष खण्डेलवाल (Ashish Khandelwal) said...

दोनों ही रचनाएं भावों की गहराई से परिपूर्ण हैं

हैपी ब्लॉगिंग

दिगम्बर नासवा said...

अलग राहें
अलग निगाहें
टुकडो में बंटी ज़िन्दगी
धीरे धीरे
अब प्यार के लम्हों
का अन्तर
समझ में आ रहा है ...

इन प्यार के लम्हों में उदासी का तड़का नज़र आ रहा है ...
ये मजबूरी के लम्हे भी कभी कभी प्यार बन जाते हैं ... अच्छा लिखा है गहरा लिखा है ..

रंजना said...

गहन अभिव्यक्ति...

Mrs. Asha Joglekar said...

वाह सुंदर प्यार के लम्हे और खूबसूरत भाव ।