Monday, July 20, 2009

इंतजार-ए-बहार


भरी सावन की बदरी
नैनों में ..
चाहत में छिपा
बंसत ..
सर्द हैं आहें
गर्म सी नरमी
बाँहों में
मौसम का हर रूप
छिपा है यहीं
इन नजरों में
और इनको
समझने को
एक बार तो
नजरों के रस्ते से
तुम्हे गुजरना होगा !!

49 टिप्पणियाँ:

कुश said...

खूबसूरत एहसास...

आशीष खण्डेलवाल (Ashish Khandelwal) said...

मौसम के इतने सारे उतार-चढ़ाव.. लाजवाब.

नीरज गोस्वामी said...

रंजना जी लाजवाब रचना है ये आपकी...सरल शब्दों में गहरी दिल की बात...वाह...ये कौशल आपही कर सकती हैं...
नीरज

काजल कुमार Kajal Kumar said...

वाह ! कुछ न कह कर भी सब कुछ कह दिया.

surender said...

wah ji wah....
kya khoob likha hai ji...
kripya aise he likhte rahiyega...

please see my latest composition @ http://shayarichawla.blogspot.com/

डॉ .अनुराग said...

मौसम का असर !!या दिल खुदगर्ज ?

दिगम्बर नासवा said...

वाह......... लाजवाब अभिव्यक्ति है .... सब कुछ नज़रें ही तो समझा देती हैं ............. मौसम के सब रंग इसी में मिलते हैं

ओम आर्य said...

bahut hi sundar rachana .....sawan ki ladi sabhi taraf lagi huee hai

रश्मि प्रभा... said...

बरसती रूमानियत और खूबसूरत ख्याल..........

अभिषेक ओझा said...

शानदार !

PN Subramanian said...

"नजरों के रस्ते से
तुम्हे गुजरना होगा !"
बहुत खूब लिखा है. सुन्दर अभिव्यक्ति. आभार

अनिल कान्त : said...

क्या खूब कहा है आपने

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

इनको
समझने को
एक बार तो
नजरों के रस्ते से
तुम्हे गुजरना होगा !!

कम शह्दों में बड़ी बात।
बधाई।

संगीता पुरी said...

बहुत सटीक .. सुंदर रचना !!

अल्पना वर्मा said...

'इनको
समझने को
एक बार तो
नजरों के रस्ते से
तुम्हे गुजरना होगा !!'

बहुत अच्छी लगीं ये पंक्तियाँ..
खूबसूरत अहसासों को चुन चुन कर पिरोया हो जैसे.

awaz do humko said...

खूबसूरत एहसास...

vandana said...

khooboorat bhav aur sundar rachna.

Udan Tashtari said...

वाह!! क्या बात है..एक बार नहीं..सौ बार गुजर जायेंगे. :) बस, समझ में आ जाये.

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

बहुत सुंदर रचना है। अंदर तक छू गई।

ताऊ रामपुरिया said...

कितना खूबसूरत एहसास है? बहुत शुभकामनाएं.

रामराम.

M VERMA said...

एक बार तो
नजरों के रस्ते से
तुम्हे गुजरना होगा ।

इतना सशक्त आह्वान --- गुजरना ही होगा
बहुत खूब

श्रद्धा जैन said...

Ek baar to raste se guzarna hoga
wah bahut khoob

mehek said...

और इनको
समझने को
एक बार तो
नजरों के रस्ते से
तुम्हे गुजरना होगा !!
waah saari kayanaat ki rumaniyat en nazaron mein ubhar ke aa gayi,bahut hi khubsurat ehsaas.

सुशील कुमार छौक्कर said...

खूबसूरत अहसास। बारिश नही आई पर शब्दों को पढकर आनंद आ गया।

Arvind Mishra said...

स्नेहिल आकांक्षा ! बढियां कविता !

vishnu-luvingheart said...

vallah...bahut khoob...

डॉ. मनोज मिश्र said...

इन नजरों में
और इनको
समझने को
एक बार तो
नजरों के रस्ते से
तुम्हे गुजरना होगा !!...
बहुत प्रभावित किया है इस रचना नें ,धन्यवाद.

बवाल said...

बहुत ही दिलकश अंदाज़ में कही गई कविता रंजू जी। आपको बहुत बहुत बधाई इस रचना के लिए।

Priya said...

mausam ko jariya banaya aapne...... pasand aayi hamko to

hem pandey said...

' इनको
समझने को
एक बार तो
नजरों के रस्ते से
तुम्हे गुजरना होगा'
- सुन्दर.

मोहिन्दर कुमार said...

आपके सुन्दर अहसास भरे लफ़्जों का चार लाईनों में जबाब दे रहा हूं जो आपकी कविता पढ कर ही लिखी हैं


दिल के दरवाजे पे दस्तक
प्यार में खामोशियों की
वर्ना तो अब इस बंद गली में
कोई भी आता जाता नहीं.

महामंत्री - तस्लीम said...

Aapki ye rachna vyaktik ho kar bhi sam saamyik ho gayi hai. Badhayi.
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

Mrs. Asha Joglekar said...

मौसम का हर रूप
छिपा है यहीं
इन नजरों में
और इनको
समझने को
एक बार तो
नजरों के रस्ते से
तुम्हे गुजरना होगा !!

खूबसूरत ।

गौतम राजरिशी said...

माशूक ये निगाहें वाकई सारे मौसम देख लेती हैं...

मुकेश कुमार तिवारी said...

रंजना जी,

खूबसूरत अहसासों से गुज़र गया
तेरे कलाम का नशा हद से गुज़र गया

नपे तुले शब्दों में भावनाओं का अंबार लगा देने के फ़न में आपका कोई सानी नही है।

सादर,

मुकेश कुमार तिवारी

'अदा' said...

ज़ज्बात में मौसम समेटे हुए आपकी कविता....
आँखों में सावन, बाँहों में तपिश..
हमारे मन ने बसंत का आनंद ले लिया...

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

इनको
समझने को
एक बार तो
नजरों के रस्ते से
तुम्हे गुजरना होगा !!

बहुत खूबसूरत रचना!!!!!

Mumukshh Ki Rachanain said...

मौन की शशक्त भाषा को एक और उच्च स्तरीय सम्मानित अभिव्यक्ति.
बधाई.

रंजना said...

इस आह्वान को जो सिरोधार्य न करे.........वह या तो अभागा होगा या हृदयहीन.......क्या कमाल का लिखा है आपने.....शब्द और भावः माधुर्य मन को रस सिक्त कर लेती है.....

बहुत बहुत सुन्दर .........

Nirmla Kapila said...

मैं देर से आयी हूँ टाब तक सभी ने बहुत कुछ कह दिया है इतने शब्द देख कर भी मैं निश्बद हूँ मगर मुझे लगता है कि अभी इस अभिव्यक्ति पर बहुत कुछ कहना बाक्र्र है जो मेरी मौन अभिव्यक्ति से आपके मन को छू लेगा बधाई इस लाजवाब अद्भुत रचना के लिये

हिमांशु । Himanshu said...

अभिव्यक्ति की खूबसूरती यहाँ मिलेगी किसी को भी । आभार ।

Prem Farrukhabadi said...

मौसम का हर रूप
छिपा है यहीं
इन नजरों में
और इनको
समझने को
एक बार तो
नजरों के रस्ते से
तुम्हे गुजरना होगा !!

बहुत खूबसूरत रचन.बधाई.

Prem Farrukhabadi said...

मौसम का हर रूप
छिपा है यहीं
इन नजरों में
और इनको
समझने को
एक बार तो
नजरों के रस्ते से
तुम्हे गुजरना होगा !!

बहुत खूबसूरत रचन.बधाई.

Prem Farrukhabadi said...

मौसम का हर रूप
छिपा है यहीं
इन नजरों में
और इनको
समझने को
एक बार तो
नजरों के रस्ते से
तुम्हे गुजरना होगा !!

बहुत खूबसूरत रचन.बधाई.

jamos jhalla said...

bahut khoob jab tak aankhen khuli tab tak aas barkraar .isi liye nazron ke teer ........
jhallevichar.blogspot.com
angrezi-vichar.blogspot.com
jhalli-kalam-se

Pankaj Mishra said...

देर से पहुचा आपके ब्लॉग पर , अच्छा लगा कविता और उसका भावांश

adwet said...

एक बार तो
नजरों के रस्ते से
तुम्हे गुजरना होगा !!

vah kya bat hai

अर्चना said...

मौसम का हर .....
तुम्हे गुजरना होगा !!

मन के उपर एक कोमल स्पर्श है यह कविता.

ecstasies said...

another nice one.. !