Thursday, January 29, 2009

मुस्कान(क्षणिकाएँ)

मुस्कान..
जैसे..
तपते मरुथल मन
पर घिरती
शीतल सी छाया !

मुस्कान..
जैसे..
नवजात की पहली
दंत पंक्ति


मुस्कान..
जैसे..
बिन कहे ही
कह दी हो
सब बात ...


मुस्कान ...
जैसे ....
पतझड़ के बाद
खिले वसन्त

38 टिप्पणियाँ:

संगीता पुरी said...

अरे वाह !!!! जितनी सुंदर रचना....उतने ही सुंदर चित्र भी....

सुशील कुमार छौक्कर said...

वाह बहुत खूब। सुन्दर चित्रों के साथ मुस्कराते शब्द।

गरिमा said...

wow :)

मीत said...

मुस्कान..
जैसे..
बिन कहे ही
बातें सब कह दी :)

bahut khoob.

कुश said...

आप की क्षणिकाए तो बरबस ही एक मुस्कान ले आई..

दिगम्बर नासवा said...

मुस्कान..
जैसे..
बिन कहे ही
कह दी हो
सब बात ...

बहुत सुंदर और खूबसूरत मुस्कान बिखेरी है छोटी छोटी मुस्कानों से

Arvind Mishra said...

मुस्कान की पढी ये क्षणिकाएं !

अल्पना वर्मा said...

बहुत ही अच्छी लगीं सभी चित्रमय क्षणिकाएं.
मुस्कान ही मुस्कान बिखेर गयीं..

mamta said...

बेहतरीन !

अभिषेक ओझा said...

मुस्कान ...
जैसे ....
आपकी...
ये क्षणिकाएं !

अनिल कान्त : said...

मुस्कान का बहुत अच्छा बखान किया आपने ....चित्र भी प्यारे हैं


अनिल कान्त
मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति

Poonam said...

बहुत प्यारी और कोमल रचनायें .

विनय said...

मनमोहक!

chopal said...

शब्दों के माध्यम से मनमोहक प्रस्तुति.....

www.merichopal.blogspot.com

डॉ .अनुराग said...

वाकई !

PN Subramanian said...

चहुँ और मुस्कान फैला दी आपने. आभार.

mehek said...

so sweet,am smiling,simply superb

purnima said...

मुस्कान..
जैसे..
बिन कहे ही
कह दी हो
सब बात ...

बहुत सुंदर और खूबसूरत मुस्कान

purnima said...

मुस्कान..
जैसे..
बिन कहे ही
कह दी हो
सब बात ...

बहुत सुंदर और खूबसूरत मुस्कान

विवेक सिंह said...

बहुतखूब जी !

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर.
धन्यवाद

Tapashwani Anand said...

मुस्कान..
जैसे..
नवजात की पहली
दंत पंक्ति

bahut khub......

Ashish Khandelwal said...

मुस्कान

जैसे आपके ब्लॉग
को पढते ही
चेहरे पर
आने वाली ताज़गी

आलोक सिंह "साहिल" said...

वाह..वाह...वाह!
क्षनिकाओं के साथ सुंदर दृश्य संयोजन ने गजब का प्रभाव छ्चोड़ा...
आलोक सिंह "साहिल'

अविनाश said...

वाह!!.एक सुंदर और सफल प्रयास
धन्यवाद

Vijay Kumar Sappatti said...

bahut sundar ranjana ji

is baar kuch alag sa hai , aur choti choti baaton men gahrai aur bhaavnaye hai chupi hui..

aapko lekhan ko badhai ..

vijay

Mrs. Asha Joglekar said...

मुस्कान
जैसे रंजू जी की ताज़ी कविता

'Yuva' said...

Bahut sundar bhav...!!
युवा शक्ति को समर्पित हमारे ब्लॉग पर भी आयें और देखें कि BHU में गुरुओं के चरण छूने पर क्यों प्रतिबन्ध लगा दिया गया है...आपकी इस बारे में क्या राय है ??

अमिताभ श्रीवास्तव said...

muskan jese
aapki rachna....

bahut sunadar he

अमिताभ श्रीवास्तव said...

muskan jese
aapki rachna....

bahut sunadar he

मोहन वशिष्‍ठ said...

वाह जी वाह बहुत ही बेहतरीन प्रस्‍तुति

बहुत बहुत धन्‍यवाद

Zakir Ali 'Rajneesh' (S.B.A.I.) said...

मुसकान की सुन्‍दर परिभाषाऍं।

shelley said...

pyari kavita ahchhi abhiwakti

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

बहुत सुन्दर क्षणिकाएं, रंजना जी!

महावीर said...

मुस्कान..
जैसे..
बिन कहे ही
कह दी हो
सब बात ...
बहुत ही सुंदर क्षणिकाएं हैं।

लाल और बवाल (जुगलबन्दी) said...

ये मुस्कान की सुन्दर परिभाषाएँ है रंजू जी।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

जब आते सुख के सन्देशे,
मुस्काने आ जाती है,
सावन आते ही हरियाली,
मरुथल में छा जाती है।

Shastri said...

वाह, क्या मुस्कराहट है !!

सस्नेह -- शास्त्री